यही हैं देवता

जसवीर सिंह ‘हलधर’देहरादून( उत्तराखंड)********************************* धरा गंदी नहीं होती गगन गंदा नहीं होता।शहीदों की चिताओं से वतन गंदा नहीं होता॥ नहीं हिन्दू नहीं मुस्लिम सिपाही तो सिपाही है,मिटा जो कौम की खातिर बना दुश्मन तबाही है।लगाओ हर दिवस मेले शहीदों की मजारों पर,निशाने हिन्द पर गाया भजन गंदा नहीं होता॥शहीदों की चिताओं से वतन गंदा नहीं … Read more

प्रियतम की प्रतीक्षा

अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** बरखा बिजुरिया नील नभ मंडराई,काले बादलों संग घिर घिर आई। समीर संग खेले तितलियाँ,बाग-ए-बहार सुर्ख पत्ते हरी डालियाँ। झिलमिलाती पवन पुरवैया,घुमड़-घुमड़ आई सावन की झड़ी। भीगा मन भीगे मौसम की अंगड़ाईयाँ,मन का मयूर डोले संग तेरे ओ साथिया। परदेश बसे मोरे मन के मितवा,सूना-सूना हृदय पुकारे ओ मोरे प्रीतवा। अब … Read more

‘कोरोना’ काल में रची कविताओं पर हुई ऑनलाइन विचार गोष्ठी

मंडला(मप्र)। ‘कोरोना’ काल में रची गई कविताओं की ऑनलाइन प्रस्तुति का कार्यक्रम सिद्धेश्वर के संयोजन में आयोजित हुआ। इसमें विशिष्ट अतिथि प्रो.(डॉ) शरद नारायण खरे (म.प्र)ने कहा कि कोरोना काल में डिजिटल पटलों पर गतिशीलता दिखी, जहां छंद विशेषज्ञों ने श्रेष्ठतापूर्ण सृजन व सीखने-सिखाने का परिवेश बनाया। नई प्रतिभाओं की खोज की,और लोगों को साहित्य … Read more

आकांक्षा

जबरा राम कंडाराजालौर (राजस्थान)**************************** जीवन में आकांक्षा होती,कुछ पाने की,कुछ बनने बनाने की,नाम कमाने की। सुख पाने-दु:ख ढहाने,शौक-मौज मनाने की,पहनने सजने-संवरने की,अच्छा खाने की। लायक नायक बनने की नर्तक या कुछ गाने की,लोगों का मन मोहने की,या मंच पर छा जाने की। अच्छा-खासा बनने की,या सिक्का जमाने की,पद प्रतिष्ठा को पाने या,पैसा-धन कमाने की। अनगिनत … Read more

नहीं सुधरता है आदमी

रेणू अग्रवालहैदराबाद(तेलंगाना)************************************ ठोकर लगी तो भी नहीं सुधरता है आदमी।सच कहने को भी तो मुकरता है आदमी। जो मुँह के सामने शहद जैसी बातें करते हैं,उनको ही अपना हितैषी मानता है आदमी। ऐसी बात करने वाले ज़हर बुझे तीर होते हैं,ऐसे तीरों को नहीं पहचानता है आदमी। आस्तीन में साँप नज़र तो नहीं आते मुझे,साथ … Read more

खामोश पल

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************ समय,वक्त,पलों का अकेलापन,यह सब रिक्तता में…उनसे गुफ्तगू करतें तो होंगेंहृदय में उनके सुकून,अपना घर बना लेता होगा। जब अपनों का,साथ उन्हें याद आता होगाहृदय में उनके भी,चुभती होगी कोई फाँस…जब प्रेमी परिंदे,अपना घरौंदा बनाते होंगे। कुछ अपनों का विरह,उन्हें भी पीड़ा देता होगा…पर जो उनके साथ बीते लम्हें,उनके अकेलेपन को…राहत से … Read more

लघुकथाकार डॉ. सतीशराज पुष्करणा नहीं रहे

दिल्ली। हिन्दी लघुकथा साहित्याकाश के दैदीप्यमान सूर्य और पितामह डॉ. सतीश राज पुष्करणा (महेन्द्रु पटना) नहीं रहे। लघुकथा जब संघर्ष के दौर में थी तो,डॉ. सतीशराज ने लेखन का बीड़ा अपने कंधों पर उठाया। व्यवसाय से प्रकाशक और अन्तःकरण से महान लघुकथाकार और लघु कथा विधा के पितामह डॉ. पुष्करणा का पंचतत्त्व में विलीन होना … Read more

क़ुदरत के करिश्मे

तारा प्रजापत ‘प्रीत’रातानाड़ा(राजस्थान) ****************************************** बिन आधार,खड़ी है धरतीबिन खम्बे आकाश,समझा कोई न आज तकपंडित-ज्ञानी-ध्यानी,क़ुदरत के करिश्मे परकैसे न हो हैरानी ? फूलों पर मंडराती फिरतीरंग-बिरंगी तितली,बादल छाए आसमान मेंऔर चमकती बिजली,कहाँ से बरसा है पानी ?क़ुदरत के करिश्मे पर,कैसे न हो हैरानी…? कैसे चमकते आसमान परसूरज-चाँद-सितारे,आपस में वो कभी न लड़तेमिल-जुल रहते सारे,लगती है एक कहानी।क़ुदरत … Read more

एक छोटा-सा गाँव

वाणी वर्मा कर्णमोरंग(बिराट नगर)****************************** एक छोटा-सा गाँव,सीधे-सादे लोगशीतल हवा पीपल की छाँव,खेतों में उपजते धान और धान से उपजती खुशियाँमन में संतोष और मेहनत से खिलता गाँव,ना छल-कपट ना दुष्टताप्रेम की भाषा और लोगों का जुड़ाव,वसुधैव कुटुम्बकम्-सीलोगों की मिलनसारिता और कोमल भाव,सबके सुख-दुःख में होते शामिलसंयुक्त परिवार और परिवारों से परिपूर्ण होता गाँव। बदला गाँव … Read more

शुद्ध-सात्विक भोजन लें हम

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** जग में व्याप्त कुपोषण की,स्थिति कर देती विचलित है।आठ अरब जनसंख्या में से,अस्सी कोटि प्रभावित हैं॥ तन में,मन में,बुद्धि-चित्त में,पड़ी कुपोषण की छाया।बुद्धि-भ्रमित,तन-कृश,मन-दूषित,चित्त सभी का बौराया॥ चंद्र लोक से मंगल गृह तक,नभ में मानव विचर रहा।किन्तु धरा में कहीं-कहीं वह,भूख,प्यास से बिफर रहा॥ हो अनाज की कमी धरा में,है ऐसा परिदृश्य नहीं।लेकिन … Read more