आन,मान,शान थे गोपाल जी

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) *********************************** जन्म,मरण सब देश के लिए ही रहा,भारती की आन,मान,शान थे गोपाल जी।श्रेष्ठ कवि,गीतकार,ज्योतिष के साधक थे,साथ-साथ नेक इंसान थे गोपाल जी॥देश में विदेश में भी,वाणी और लेखनी से,राष्ट्र भाषा के ही प्रतिमान थे गोपाल जी।सारी दुनिया के सारे दिलों मे करेंगे राज,वास्तव में इतने महान थे गोपाल जी॥ परिचय-प्रख्यात कवि,वक्ता,गायत्री साधक,ज्योतिषी और … Read more

वेणी

बोधन राम निषाद ‘राज’ कबीरधाम (छत्तीसगढ़)************************************* नारी वेणी साजती,सुन्दर यह श्रृंगार।ममता की मूरत भली,देखें सब संसार॥देखें सब संसार,त्रिवेणी जैसी संगम।नारी शोभित केश,सुहानी लगती हरदम॥कहे ‘विनायक राज’,बने राधा-सी प्यारी।गूँथे वेणी रोज,दिखे सुंदरता नारी॥

नि:स्वार्थ था विद्यार्थी जीवन

संदीप धीमान चमोली (उत्तराखंड)********************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. तेरा-मेरा,जाति-पातीबन गया लाभार्थी जीवन,नि:स्वार्थ था कभी वो-मेरा विद्यार्थी जीवन। जेब थी ख़ाली,वित्त नहींसंग थे चित्त,चित्त नहीं,ऊंची उड़ान भरा था वो-मेरा विद्यार्थी जीवन। चिंता थी चित्त चोर कीपढ़ाई के घर में शोर की,आगे बढ़ने की होड़ की-बिन पैसे मस्ती दौड़ की। परीक्षा पास तो जागे रातोंकभी मोहब्बत … Read more

बड़ा प्यारा-न्यारा था विद्यार्थी जीवन

ममता तिवारीजांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. बन्द स्मृति पट खुलते जब-जब,पलकों में स्कूल ड्रेस लहराती हैआते बरसात मोगरे सँग-सँग,नई कागज की महक छा जाती है़। अब लगते सपनीले सब-कुछ,कोमल निर्मल शीतल छीन पलविद्यार्थी जीवन बड़ा प्यारा-न्यारा था,पता नहीं थे तब जीवन के छलबेफिक्र फूल खिले तब खुशियों के,जवाबदारियों-कर्तव्यों के काँटें हैं। जीवन झँझट … Read more

मस्ती भरे वो दिन

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. तन में मस्ती,मन में मस्तीदिनभर खेल-कूद में जाता,ना भविष्य की चिंता कोई-सुखमय समय बीतता जाता। राम-रहीम नहीं था कोईभेदभाव की बात नहीं थी,मिल-जुल कर सब खाते-पीते-राव रंक की जात नहीं थी,छीना-झपटी होती रहतीकोई रूठता कोई मनाता।ना भविष्य की चिंता कोई,सुखमय समय बीतता जाता…॥ साइकिल दौड़ती फर्राटे … Read more

मैं भी पढ़ने जाता था

उमेशचन्द यादवबलिया (उत्तरप्रदेश) ************************************* मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. मन भाए बचपन की यादें,मन के राग मैं गाता था,बचपन मेरा बड़ा निराला,मैं भी पढ़ने जाता था। अच्छा लगता मित्रों के संग में,कागज की नाव चलाता था,बचपन मेरा बड़ा निराला,मैं भी पढ़ने जाता था। पहले तो मन लगा नहीं था,रोते इधर-उधर भग जाता था,बचपन मेरा बड़ा … Read more

नींव सफलता की यही

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ उदयपुर(राजस्थान) *************************************** मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….. मात-पिता का एक था सपना,मैंने बना लिया वह अपना,पढ़-लिख कर मैं कुछ बन जाऊँ,सबजन का मैं मान बढ़ाऊँ। शिक्षा इसके लिए जरूरी,जो मन से मैंने की पूरी,शुरू हुआ विद्यार्थी जीवन,लगा दिया अपना यह तन मन। मैं दिन-रात मेहनत करता,कभी नहीं पढ़ने से डरता,आर्थिक हालात नहीं … Read more

जिंदगी की कश्मकश…

विद्या होवालनवी मुंबई(महाराष्ट्र )****************************** जिंदगी की कश्मकश में,हौंसले बुलंद करआगे बढ़ना है,कभी प्यार तोकभी गम बाँटना है। कभी खुशी की आँधी से तो,कभी मुसीबतों केतूफानों से जूझना है,कभी फर्ज के लिए तोकभी धर्म के लिए,कुर्बानियों की चट्टानों को लाँघना है। कभी उम्मीदों की नाव पर तो,कभी नादानी की कश्ती मेंसफर तय करना है,कभी धैर्यता की … Read more

वह परिवार बुरा लगता है़

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ दिन सीमित है निशि सीमित है,सीमित है जीवन धन अपनालेकिन जो बढ़ रहा निरन्तर,वह परिवार बुरा लगता है।मांग बढ़ गई पूर्ति घट गई,कोटि-कोटि जन व्यर्थ हो गएऐसी भीड़ बढ़ी कि हम सब,एकाकी असमर्थ हो गए।भाव न जिसके रहें संतुलित,वह बाजार बुरा लगता है। आमद कम है खर्च अधिक है,चिंता घर-घर बस्ती-बस्तीचीजें कर दीं … Read more

मैकाले की आत्मा

डॉ. रवि शर्मा ‘मधुप’रानी बाग(दिल्ली)****************************** ‘मैकाले’ तो आम आदमी की तरह वक्त आने पर नश्वर देह को त्यागकर इस संसार से कूच कर गए, परंतु आत्मा तो अजर-अमर है। शरीर से निकलने के बाद वह यमदूतों के साथ चल देती है। ऐसा प्रायः सामान्य आत्माएँ करती हैं। कुछ आत्माएँ असामान्य-असाधारण होती हैं। वे बँधे-बँधाए कायदे … Read more