आया पुरुषोत्तम मास

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* आया पुरुषोत्तम मास, पुण्य की पावन बेला,भक्ति-भाव से भर उठता जन-जन का हर मेलानाम-स्मरण, सत्कर्मों से जीवन होता उज्ज्वल,हरि-कृपा बरसाती धरती, अम्बर व अलबेला। दान, धर्म, जप, तप से मन का नित कल्मष धुलता,सद्विचार का दीपक अंतर्मन में है जलतालोभ, मोह, अहंकार सभी चरणों में झुक जाते,पुरुषोत्तम की महिमा से भाग्य नया फिर फलता। गीता, … Read more

सामने आते ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के दुष्परिणाम

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** भारत सहित विश्व के अनेक देशों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का चलन तेजी से बढ़ा है। आधुनिक जीवन-शैली, शहरीकरण, आर्थिक स्वतंत्रता, शिक्षा के विस्तार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती अवधारणा ने इस व्यवस्था को समाज के एक वर्ग में स्वीकार्यता दिलाई है। ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ का मूल विचार … Read more

क्या ‘अंग्रेजी’ की पढ़ाई भारतीय भाषाओं को लील जाएगी ?

प्रवीण कुमार जैनमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* मेरी ये चिंताएँ केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक कड़वा धरातलीय सत्य हैं। जिन बिंदुओं को मैंने रेखांकित किया है, वे भारतीय समाज के ‘सांस्कृतिक आत्मसमर्पण’ की ओर संकेत कर रहे हैं। जिस गति से महानगरों में परिवारों ने मातृभाषा को ‘पिछड़ेपन’ की निशानी मानकर त्याग दिया है, वह स्थिति वास्तव … Read more

‘मुट्ठी भी मिट्टी’ कहानी बताती है कि हम कितने खोखले-डॉ. गजभिये

भोपाल (मप्र)। ‘मुट्ठी भी मिट्टी’ अति आधुनिक युग की कहानी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि आधुनिक व्यवस्था में मनुष्य की भावनाएं मरती जा रही हैं। महानगरों में जीवन सिमट गया है। आधुनिक समाज व्यवस्था में यदि आपके पास पैसे नहीं हैं तो पीने का पानी भी नहीं मिलेगा। इस कहानी में प्रकृति का … Read more

स्वर्ग है शाश्वत सुख और दिव्य चेतना का लोक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय वैदिक, पौराणिक एवं आध्यात्मिक परम्परा में ‘स्वर्ग’ केवल एक भौतिक स्थान नहीं, अपितु पुण्य, सदाचार, धर्म, न्याय, प्रेम और दिव्य चेतना का परम प्रतीक माना गया है। यह वह अलौकिक लोक है, जहाँ दुःख, क्लेश, रोग, शोक, भय और अभाव का प्रवेश नहीं होता। स्वर्ग को देवताओं का … Read more

सपने हौसलों से पूरे होते

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** हौसलों में है तेरे अभी दम बहुत,तू न थकेगा कभी, न रुकेगा कभीजब तलक मन में रहती है दुर्बलता,दु:ख में होता है दु:ख, सुख में है ममता। जग में सुख भी सदा रहने वाला नहीं,दु:ख भी जीवन में रहता हमेशा नहींछाया से माया से दोनों होते सदा,आते-जाते ही रहते हैं सुख और … Read more

पटना उच्च न्या. में हिंदी का संघर्ष अब पहुंचा सीबीआई के द्वार

पटना (बिहार)। न्याय में हिंदी के लिए संघर्षरत अधिवक्ता इंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि बार-बार मना करने के बाद भी वे हिंदी में ही आवेदन दाखिल करते आ रहे हैं, जिसका उद्देश्य हिंदी को उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों की भाषा बनाना है, जिसे लुका-छिपा कर उनके विरुद्ध कुछ झूठा आरोप गढ़ा गया है और … Read more

घर लौटने की आख़िरी रोशनी

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** उसके भीतरएक उम्र नहीं,कई-कई उम्रें टूटती रहती हैंबिना किसी आवाज़ के। चेहरे पर सामान्य दिनों की धूल जमी रहती है,पर आत्मा मेंलगातार गिरते रहते हैंकुछ अदृश्य मकान। मैंने देखा है,कुछ लोग पूरी ज़िंदगीसिर्फ़ लौटने की इच्छा में जीते हैं। वे अपने भीतरएक पुराना आँगन बचाए रखते हैं,जहाँ माँ की पुकार अब भी … Read more

आदि अनंत महाकल्प मैं

आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** हर समस्या का विकल्प मैं, हर निदान का संकल्प मैंलाचारों का एक वृक्षकल्प मैं, निर्भय हूँ, सत्य हूँ ब्रह्मकल्प मैं। न्याय हूँ, साकार हूँ प्रतिकल्प मैं, अन्याय का प्रतिकार, नरकल्प मैंराक्षसों का नाश हूँ, ग्रहकल्प मैं, पारदर्शी प्राण हूँ, तरुकल्प मैं। जागता मैं देश हूँ, न मृतकल्प मैं, स्वस्थ हूँ, आश्वस्त, न रोगीकल्प मैंकर्म … Read more

शिव प्रेम की डोरी

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** मन संवाद करूं मैं तुमसे, बंधो शिव प्रेम की डोरी से।तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से॥ डर से नहीं बदलते हो तुम प्रेम-तर्क से बदले हो,प्रेम के भूखे जन्म-जन्म से तड़प- कसक से बदले हो।। तुम्हें न भय जंजीरों का, खुश होते माँ की लोरी से,तुम हो एक छोटे से बालक, बंधो न जोरा-जोरी से…॥ … Read more