चलो चलें, कुछ कमाना है

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ********************************************** चलो चलें कुछ कमाना है,अपने दम पर जमाने कोकुछ नया कर दिखाना है,चलो चलें, कुछ कमाना है। किसी से हाथ जोड़कर नहीं,किसी से दया भाव लेकर नहींमेहनत ही मेहनत करते रहना है,पसीने से इतिहास लिख जाना है। अपने हालात पर हँसने वालों को,कुछ अनोखा कर दिखाना हैधन से नहीं, हमें … Read more

माँ तेरा जाना…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* माँ, तेरा जाना आँखों में सावन भर जाता है,तेरे बिन हर कोना सूना-सूना हो जाता हैतेरे चरणों में जो सुख था, वह कहाँ से लाएँगे,अगले बरस फिर आना अम्ब, हम राह निहारेंगे। तेरी दिव्य ज्योति से माँ, घर-आँगन उजियारा है,तेरी कृपा से जिंदगी का हर संकट हारा हैजाओ माँ, … Read more

मन का आभूषण ‘अभिव्यक्ति’

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** मन को सजाना ही आभूषण,स्त्रियों के लिएमन से दूर रखें- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, अंहकार अपनेप्रेम, दया, क्षमा, ममता, धैर्य सौहार्द, मन के सच्चे गहने। पत्नी को परमेश्वर मानते,पति, पत्नी को सर्वप्रिये मानतेस्त्री का गहना ही पति होते।आभूषण वही जो पिया मन भाए,जो जीवनभर सुहागन को गहना पहनाए॥

कल्पकथा नवंबर २०२६ मासिक सम्मान समारोह में विद्वतजन सम्मानित

सोनीपत (हरियाणा)। प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार द्वारा रघुवंशमणि सिंह के मुख्य आतिथ्य एवं डॉ. गजेन्द्र हरिहरणों ‘दीप’ की अध्यक्षता में कल्पकथा नवंबर २०२६ मासिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें वाराणसी के पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’ को कल्प शिल्प विभूषण एवं लखनऊ के डॉ. … Read more

विविधा सृजन सम्मान–२०२६ में मिलेगा ११ हजार का पुरस्कार

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श्रीगंगानगर (राजस्थान)। संस्था विविधा (सूरतगढ़) की ओर से साहित्य की विभिन्न विधाओं को लेकर २०२४ एवं २०२५ के पुरस्कारों की घोषणा और पुरस्कृत साहित्यकारों के सम्मान के बाद अब २०२६ के लिए अनेक विधाओं हेतु प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। यह प्रविष्टि ३० नवम्बर तक भेजी जा सकती है।    संरक्षक डॉ. एन. के. सोमाणी(६३५००३५६६८) के … Read more

अरे, न इत-उत डोल…

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** मानव तन पाया है पगले,          जीवन है अनमोल।मन माधव को भज ले अब तो,        अरे न इत उत डोल॥ पाप पुण्य सब पथ पर होंगे,          रखना इतना ध्यान।थोड़े से सद्गुण हैं भू पर,           हैं दुर्गुण की खान॥अंधा … Read more

खुशियों की रात

ममता सिंह ‘विशिष्ट’धनबाद (झारखंड)****************************** अमृत की रात (शरद पूर्णिमा विशेष)… आश्विन शरद पूर्णिमा की रात में अमृत की किरणे बरसाती है,पूर्ण चन्द्रमा की सोलह कलाएं रात में आज मिल कर चाँदनी फैलाती हैं। धार्मिक मान्यता हैं हमारी बरसों से,श्री कृष्ण वृन्दावन में रास रचाते हैं वृंदावन की गोपियाँ भी कृष्ण के संग में,हँसी-खुशी मिल नाचती-गाती हैं। खीर का … Read more

लक्ष्मी माँ आएंगी..

डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)********************************** झाड़ो, झटको, पोंछो,        घर-आँगन अरु द्वार।लक्ष्मी माँ आएगी,           सुख देने संसार॥ स्वच्छ गेह जब हो तो,               माँ आती है दौड़।ठुमुक-ठुमुक आती है,             अपना मंदिर छोड़॥लाल चुनरिया चढ़ती,              नव … Read more

संत की भाँति साहित्य की साधना की श्रीरंजन सूरिदेव ने

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काव्यांजलि… पटना (बिहार)।   अपने समय के जीवित शब्द-कोश थे आचार्य श्रीरंजन सूरिदेव। संस्कृत सहित अनेक भारतीय भाषाओं के वे महापण्डित और ‘प्राकृत’ तथा ‘अपभ्रंश’ के अंतिम अधिकारी विद्वान थे। उन्होंने संत की भाँति साहित्य की साधना की। प्रणम्य साहित्यकार बाबू रघुवीर नारायण एक ऐसे कवि थे, जिनकी एक गीति-रचना ‘बटोहिया’ ने उन्हें साहित्य-संसार में … Read more

दिल एक खिलौना

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)**************************************** दिल एक खिलौना है,सच ही कहा है तुमनेइस संसार के खेल में,दिल को ही अपना मानते। संसार की माया के बीच में,दिल अनेक रंग दिखाताकाम क्रोध लोभ मोह,हर पल इसे बहकाते। ममता और अहंकार अपना घर बनाते,हर मानव के दिल में ये संसार बसेदिल तो मेरा है दिया तुम विश्वास में,अपनी … Read more