भाषा पर चिन्ता प्रकट करता समाज

भाषा और संस्कृति के अंर्तसंबंधों पर भारतीय मनीषियों ने हर एक समय-काल में चिंतन किया है। उस चिंतन को अपने वक्तव्यों, विमर्शों, लेखन और संवादों द्वारा समाज तक पहुँचाने की…

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बड़ा गुनाह

अजय जैन ‘विकल्प’इंदौर(मध्यप्रदेश)****************************************** बड़ा गुनाहमिले ऐसी सजाना दें पनाह। कैसा समयतार-तार अस्मितातोड़ा सम्मान। ये लोक-तंत्र!बुरा विचार-आगस्त्री कब तक? ये कैसी हिंसा ?लूट रहे अमनभूले अहिंसा। जरूरी न्यायना हो हैवानियतना हो…

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सरिता बहे हित में

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* सरिता बहे जगत के हित में, सबको नीर दे।खेत सींचती,मंगल करती,सबकी पीर ले॥सरिता अपना धर्म निभाती, बहती ही रहे।कोई कितना कर दे मैला, सहती ही रहे॥…

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सावन बरसे, खुशियाँ घर-आँगन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* पावन सावन-मन का आँगन... मुस्कान खिली ऋतु पावस मुख, आनंद मुदित मधु श्रावण है,फुलझड़ियाँ बरखा हर्षित मन, नीड़ भरा माँ का आँगन हैमहके खुशबू…

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पावन व पवित्र माह

डॉ.अशोकपटना(बिहार)********************************** पावन सावन-मन का आँगन... पावन पवित्र सावन,पवित्र भावनाओं को सहेजने वालीअनुपमा का अपूर्व सौन्दर्य है,उन्नत ईश्वरीय खोज कासुन्दर आभार लगता है यहाँ,मानों हम घोषित कर दिए गए दिग्विजय हैं,हमें…

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काबिले तारीफ

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** रीना बचपन से ही बहुत शांत स्वभाव की थी। उसका यह स्वभाव माँ के लिए बड़ी परेशानी की वजह थी, चूंकि पढ़ने-लिखने में बहुत अव्वल होने के…

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झूले झूलती है बेटियाँ

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर(मध्यप्रदेश)**************************************** पावन सावन- मन का आँगन... पावन सावन बना मन का आँगन,सावन की बौछार पर नाचती बेटियाँ। ईश्वर का वरदान होती है बेटियाँ,सुरों पर अधिकार रखती है बेटियाँ।…

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राजनीतिक चंदे की पारदर्शी व्यवस्था जरूरी

ललित गर्गदिल्ली************************************** वर्ष २०२४ के आम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे का मुद्दा एक बार फिर गरमा रहा है। लोकतंत्र की एक…

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जो देखा वह लिखा, जिसमें सामाजिक विषयों की जीती-जागती तस्वीर

इन्दौर (मप्र)। आशा पूर्णा जी ने अपने जीवन के ८६ वर्ष लेखन में व्यतीत किए। उन्होंने जो देखा वह लिखा, जिसमें तात्कालीन, पारिवारिक, सामाजिक विषयों की जीती-जागती तस्वीर मिलती है।…

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स्थापना दिवस:राष्ट्रीय महाकाव्य गोष्ठी २१ जुलाई को

मुम्बई (महाराष्ट्र)। सामाजिक साहित्यिक जागरुकता मंच (मुंबई) का ३०वां स्थापना वर्ष २१ जुलाई को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रीय महाकाव्य गोष्ठी आयोजित की गईं है,…

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