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ऐसे शब्द बनाएँ,जो सार्थक होने के साथ-साथ आसानी से चलने की संभावना भी हो

डॉ. एम.एल. गुप्ता ‘आदित्य’

मुम्बई(महाराष्ट्र)
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मुद्दा-वेबिनार बनाम अपने शब्द

कोरोनाकाल में तेजी से उभर कर आए ऐसे माध्यम जहाँ बिना मिले, संवाद,बैठक,संगोष्ठी,कार्यशाला,कक्षा, शिक्षण-प्रशिक्षण,प्रस्तुति व चर्चा आदि हो सकें,उनके लिए अंग्रेजी के अनेक शब्द भी सामने आए हैं जो अब तक भारतीय भाषाओं में प्रचलित शब्दों को भी रौंद सकते हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि,हम समय रहते ऐसे शब्द बनाएँ जो सार्थक होने के साथ-साथ व्यापकता लिए हों,सरल व स्पष्ट हों,पूर्व प्रचलित हों और जिनके आसानी से चलने की संभावना भी हो। इस संबंध में मैंने ‘ई’ उपसर्ग का सुझाव रखा था, जिससे ऐसे अनेक शब्द बन सकें।
‘ई’ मैं इलेक्ट्रॉनिक,इंटरनेट और इंट्रानेट तीनों का समावेश है। विस्तार की दृष्टि से ‘वेब’ इनके मुकाबले कहीं भी नहीं टिक पाता। दूसरी बात यह है कि,यदि वेब को वर्ल्ड वाइड वेब माना जाए तो उसमें भी लिखित, श्रव्य(ऑडियो)-दृश्य(वीडियो) और सजीव (लाईव)प्रस्तुति यानी तीनों का समावेश होता है और यहाँ इलेक्ट्रॉनिक,इंटरनेट और इंट्रानेट में भी इन तीनों का समावेश है। हालांकि,इलेक्ट्रॉनिक,इंटरनेट और इंट्रानेट इन तीनों में ह्रस्व ‘इ’ है,इसलिए इसमें ‘ई’ के बजाय ‘इ’ का प्रयोग होना चाहिए था,लेकिन बोलने की सुविधा और प्रचलन के चलते हुए ‘ई’ का प्रयोग संगत प्रतीत होता है।
भविष्य के अन्य माध्यमों के लिए भी इनका प्रयोग आसानी से हो सकेगा, जबकि आगामी प्रौद्योगिकी में ‘वेब’ का प्रयोग हो यह आवश्यक नहीं,तो फिर हम असीमित संभावनाओं वाले उपसर्ग ‘ई’ को क्यों न चुनें। एक शब्द अथवा अनुसर्ग से विभिन्न अर्थछायाएंँ व अवधारणाएँ होती हैं।
इलैक्ट्रॉनिक,इंटरनेट तथा इंट्रानेट आदि के अनेक माध्यमों से जो प्रस्तुतियाँ और उससे जुड़े जो प्रमुख शब्द सामने आ रहे हैं,वे हैं-वेबिनार में वेब, ऑनलाइन चर्चा में ऑनलाइन,वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वीडियो,वर्चुअल मीटिंग में वर्चुअल,फेसबुक लाइव में लाइव आदि। यदि हम इनके लिए केवल ‘ई’ का प्रयोग करें तो इनसे बनने वाले वर्तमान और भविष्य के सभी तमाम शब्दों में प्रयोग किया जा सकेगा।
उदाहरण-वेबिनार=ई-संगोष्ठी,वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग=ई-बैठक,ई-सम्मेलन आदिl ऑनलाइन डिस्कशन=ई-चर्चा,वर्चुअल मीटिंग=ई-बैठक, वर्चुअल क्लास=ई-कक्षा,व्हाट्सैप,
फे़ेसबुक,ट्विटर आदि पर होने वाली चर्चा=ई-चर्चा/ई-संवादl इस प्रकार उपरोक्त सभी माध्यमों पर (लिखित, वाचिक अथवा श्रव्य-दृश्य या जीवंत)=ई-व्याख्यान,ई-कार्यशाला,ई-काव्य गोष्ठी,ई-प्रस्तुति,ई-परिचर्चा, ई-काव्य पाठ,ई-प्रतियोगिता,ई-संबोधन,ई-संवाद आदि अनेक शब्द बनाए और प्रयोग में लाए जा सकेंगे। हम अंग्रेजी के शब्दानुवाद व अनुसरण तक क्यों सीमित रहें।