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मत बाँटो इंसान को

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी
कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)

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जाति-धर्म की बातें कर यूँ मत बाँटो इंसान को,
मिल-जुल कर तुम रहो बचा लो अपने देश महान को।

कुछ नेता बस घात करेंगे,
झगड़े वाली बात करेंगे।
जेठ महीने के दिन को भी,
काली आधी रात करेंगे।
इन दुष्टों की नज़र लगी है प्यारे हिंदुस्तान को-
मिल-जुल कर तुम रहो बचा लो अपने देश महान को॥

सबने बहुत सम्हाला इसको,
किया जगत में आला इसको।
कुछ बंदे जो भटक गये हैं,
पिला रहे विष प्याला इसको।
हेतु देश के अमर हो गये कितने देकर जान को-
मिल-जुल कर तुम रहो बचा लो अपने देश महान को।

मनुज-मनुज में भेद नहीं है,
सत्य अटल में छेद नहीं है।
ग्रंथ सभी हैं प्रेम सिखाते,
भेद करे वह वेद नहीं है।
लड़ कर अपमानित मत करना गीता और कुरान को-
मिल-जुल कर तुम रहो बचा लो अपने देश महान को॥

अलख जगाया था वीरों ने,
देश बचाया था वीरों ने।
चैन हमें देने की खातिर,
शीश कटाया था वीरों ने।
दे दी हमें आजादी उनके याद करो बलिदान को-
मिल-जुल कर तुम रहो बचा लो अपने देश महान को॥

परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। वर्तमान में भी कुशीनगर में ही हैं,और स्थाई पता यही है। स्नातक तक शिक्षित श्री कुशवाहा क़ा कार्यक्षेत्र-शिक्षण(शिक्षक)है। आप सामाजिक गतिविधि में कवि सम्मेलन के माध्यम से सामाजिक बुराईयों पर प्रहार करते हैं। आपकी लेखन विधा-काव्य सहित सभी विधाएं है। किताब-‘सब रोटी का खेल’ आ चुकी है। साथ ही विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। आपको गीतिका श्री (सुलतानपुर),साहित्य रत्न(कुशीनगर) शिल्प शिरोमणी सम्मान(गाजीपुर)प्राप्त हुआ है। विशेष उपलब्धि-आकाशवाणी से काव्यपाठ करना है। आकाश महेशपुरी की लेखनी का उद्देश्य-रुचि है।

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