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जीवन का आधार `धरा`

सुशीला रोहिला
सोनीपत(हरियाणा)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……………


धरा धैर्य को धारण करती,
धरा की है अमिट कहानी
पानी पर है तैरती,
सहस्त्र थपेड़ों की मार झेलती।
सूर्य की परिक्रमा धरा निरन्तर है करती,
संघर्ष सहती मगर कभी कुछ न कहती
दिन-रात है सब प्राणियों की एक माला,
धरा बतलाती यही है बन्दे तेरा फसाना।

धरा और प्रकृति का मेल अनोखा,
फल-फूल,अन्न जल धरा का है देना
सब प्राणियों की क्षुधा और त्रास मिटाती,
विन्रमता का सबको पाठ सिखातीl
जीवन का आधार धरा,मंजिल की नींव धरा,
सबका भार उठाती,धरती माँ है कहलाती।

धरा है पावन,सीता माँ को गोदी में बिठाया,
तीन लोक में सीता माँ का मान बढ़ाया
सोकर उठ पहले धरा को नमन करें,
पीछे धरा पर पैर हमारे पड़े।
धरा की करें सफाई,
हरी-भरी रहे प्रकृति हमारी,
धरा खुशियाली रहे हमारी,
यह सदभावना हो सबकी।

परिचय-सुशीला रोहिला का साहित्यिक उपनाम कवियित्री सुशीला रोहिला हैl इनकी जन्म तारीख ३ मार्च १९७० और जन्म स्थान चुलकाना ग्राम हैl वर्तमान में आपका निवास सोनीपत(हरियाणा)में है। यही स्थाई पता भी है। हरियाणा राज्य की श्रीमती रोहिला ने हिन्दी में स्नातकोत्तर सहित प्रभाकर हिन्दी,बी.ए., कम्प्यूटर कोर्स,हिन्दी-अंंग्रेजी टंकण की भी शिक्षा ली हैl कार्यक्षेत्र में आप निजी विद्यालय में अध्यापिका(हिन्दी)हैंl सामाजिक गतिविधि के तहत शिक्षा और समाज सुधार में योगदान करती हैंl आपकी लेखन विधा-कहानी तथा कविता हैl शिक्षा की बोली और स्वच्छता पर आपकी किताब की तैयारी चल रही हैl इधर कई पत्र-पत्रिका में रचनाओं का प्रकाशन हो चुका हैl विशेष उपलब्धि-अच्छी साहित्यकार तथा शिक्षक की पहचान मिलना है। सुशीला रोहिला की लेखनी का उद्देश्य-शिक्षा, राजनीति, विश्व को आतंकवाद तथा भ्रष्टाचार मुक्त करना है,साथ ही जनजागरण,नारी सम्मान,भ्रूण हत्या का निवारण,हिंदी को अंतर्राष्ट्रीय भाषा बनाना और भारत को विश्वगुरु बनाने में योगदान प्रदान करना है। लेखन में प्रेरणा पुंज-हिन्दी है l आपकी विशेषज्ञता-हिन्दी लेखन एवं वाचन में हैl