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मुझे गुलाब बहुत पसंद है

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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तुम्हें पता था,मुझे गुलाब बहुत पसंद है,
सही मायनों में,फूलों की महक को अब जान पाई।
सुबह की इस सुनहरी अनुभूति ने,
तुम्हारे द्वारा लगाए इन सुंदर गुलाबों ने
आज यह मुझे बता दिया कि-
तुम यह जानते हो कि मुझे गुलाब बहुत पसन्द है
पर तुमने कभी जताया नहीं,
महकाते रहे मुझे और मेरे अस्तित्व को।
मेरे घरौंदे की छोटी-सी इस बगिया को,
फूलों से भर दिया
बहुत सरल है हमारी जिंदगी,
क्योंकि तुमने कभी कठिन,
इसे बनने नहीं दिया।
धीरे-धीरे मेरे सब सपनों को आकार दिया,
जताया नहीं,पर प्रेम मुझे बेशुमार किया।
समझती हूँ मैं भी कब से तुम्हारे भावों को,
पर तुम्हारे सामने
ऐसे अनजान बन कर जीना मुझे अच्छा लगा।
तुमने सींचा है हमारे रिश्ते को,
अनगिनत मासूम लम्हों से
तभी तो कभी न मुरझाने दिया,
तुमने मेरी मासूमियत को।
महकती रही मैं,
अपने जीवन के हर एक आयाम में
तुम सुगन्ध बन बिखरते रहे,
मेरे जीवन के पन्नों पर।
मैँ जानती हूँ…
तुम्हें पता है मुझे गुलाब बहुत पसंद है॥

परिचय-डॉ. वंदना मिश्र का वर्तमान और स्थाई निवास मध्यप्रदेश के साहित्यिक जिले इन्दौर में है। उपनाम ‘मोहिनी’ से लेखन में सक्रिय डॉ. मिश्र की जन्म तारीख ४ अक्टूबर १९७२ और जन्म स्थान-भोपाल है। हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाली डॉ. मिश्र ने एम.ए. (हिन्दी),एम.फिल.(हिन्दी)व एम.एड.सहित पी-एच.डी. की शिक्षा ली है। आपका कार्य क्षेत्र-शिक्षण(नौकरी)है। लेखन विधा-कविता, लघुकथा और लेख है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन कुछ पत्रिकाओं ओर समाचार पत्र में हुआ है। इनको ‘श्रेष्ठ शिक्षक’ सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। लेखनी का उद्देश्य-समाज की वर्तमान पृष्ठभूमि पर लिखना और समझना है। अम्रता प्रीतम को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाली ‘मोहिनी’ के प्रेरणापुंज-कृष्ण हैं। आपकी विशेषज्ञता-दूसरों को मदद करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिन्दी की पताका पूरे विश्व में लहराए।” डॉ. मिश्र का जीवन लक्ष्य-अच्छी पुस्तकें लिखना है।