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`कोरोना` के जिम्मेदार

डॉ.शैल चन्द्रा
धमतरी(छत्तीसगढ़)
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“अरे! दूर से सब्जी थैले में डाल। तुझे मालूम नहीं है क्या ? `कोरोना` यहाँ-वहाँ पूरे भारत में फैल रहा है। यह तुम लोगों जैसे गरीब अनपढ़ लोगों से फैल रहा है। तुम जैसे गँवार लोग पता नहीं कब समझोगे ?”
मिसेज वर्मा ने सब्जी वाले को हिकारत भरी नजरों से देखते हुए क्रोधित स्वर से कहाl यह सुनकर सब्जी वाले ने संयत स्वर से कहा-“मैडम जी,बुरा न मानें तो एक बात कहूँ। हम जैसे गँवार,अनपढ़ और गरीब लोगों ने कभी किसी का अहित नहीं किया। कोरोना हम जैसे गरीब लोगों से भारत में नहीं फैला है ,बल्कि रईसों और धनिक लोगों से फैला है। ऐसे लोग ही विदेशों में रहते हैं या घूमने जाते हैं। ऐसे विदेशों से लौटने वालों में क्या कोई अनपढ़,गँवार गरीब व्यक्ति था ? नहीं न ? सबके सब पढ़े-लिखे और धनवान लोग हैं। उन्हीं लोगों ने कोरोना को फैलाया है मैडम जी। क्या यह सही नहीं है ?”
सब्जी वाले का यह तर्क सुनकर मिसेज वर्मा निरुत्तर रह गईं। वे आँखें चुराते हुए वहाँ से तेजी से चली गईं।

परिचय-डॉ.शैल चन्द्रा का जन्म १९६६ में ९ अक्टूम्बर को हुआ है। आपका निवास रावण भाठा नगरी(जिला-धमतरी, छतीसगढ़)में है। शिक्षा-एम.ए.,बी.एड., एम.फिल. एवं पी-एच.डी.(हिंदी) है।बड़ी उपलब्धि अब तक ५ किताबें प्रकाशित होना है। विभिन्न कहानी-काव्य संग्रह सहित राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में डॉ.चंद्रा की लघुकथा,कहानी व कविता का निरंतर प्रकाशन हुआ है। सम्मान एवं पुरस्कार में आपको लघु कथा संग्रह ‘विडम्बना’ तथा ‘घर और घोंसला’ के लिए कादम्बरी सम्मान मिला है तो राष्ट्रीय स्तर की लघुकथा प्रतियोगिता में सर्व प्रथम पुरस्कार भी प्राप्त किया है।सम्प्रति से आप प्राचार्य (शासकीय शाला,जिला धमतरी) पद पर कार्यरत हैं।

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