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सुरक्षित बनाओ समाज

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड) 
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रूठ गया काम छूट गया दोस्तों का मिलना,
प्रेमी का प्रेम छूटा छात्रों का छूटा पढ़ना।
घर से बाहर निकलना हो गया है मना,
बाहर है बैठा सज-सँवर कर ‘कोरोना।’

देख परिस्थिति आज इस संसार की,
दुःखी हो सबको आ गया है रोना।
जान लो कोरोना है मौत का गहना,
फिर इससे बचकर है सबको रहना।

सुन लो भैया और सुन लो बहना,
एकाग्र होकर तुम मानो मेरा कहना।
जीवन है ईश्वर की अनुपम रचना ,
सावधानी बरत इसे संजोए रखना।

माना एकांत हो लगे हो हँसी खोने,
पापा कहते साबुन से हाथ धोने।
मनोरंजन हेतु घर पर हैं सगे अपने,
बाहर निकल मत तोड़ो उनके सपने।

लक्षण है रोग का सर्दी बुखार खाँसी,
अछूता रहा नहीं मुम्बई,इन्दौर या काशी।
कहे मोदी-रहो घर में कहलाओगे साहसी,
निकलोगे बाहर तो बनोगे स्वर्गवासी।

कह रहा ‘राजू’ एक बात तुम्हें आज,
कोरोना से जीतने का एकमात्र राज।
घर में रह सुरक्षित बनाओ समाज,
घर में रह सुरक्षित बनाओ समाज॥

परिचय–साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव- लोहापिटटी में हैl जन्मतारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद हैl भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन(डिप्लोमा)की शिक्षा प्राप्त की हैl साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी(विद्यालय में शिक्षक) हैl सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैंl लेखन विधा-कविता एवं लेख हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना हैl पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैंl विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।