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गलती

अलीशा सक्सेना
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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प्रिया को नाचने का बहुत शौक था,और इस शौक को वह जुनून की तरह करती थी। दिन-रात नृत्य के अलावा कुछ नहीं सूझता था। एक दिन समाचार-पत्र में एक समाचार आया कि उनके शहर में नृत्य स्पर्धा आयोजित की जा रही है। यह समाचार पढ़कर प्रिया की खुशी का ठिकाना ना रहा,वह इस प्रतियोगिता में भाग लेना चाहती थी। उसने अपनी माँ से इस बात की अनुमति मांगी,तो उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि अभी तुम्हारी परीक्षा सिर पर है,पहले परीक्षा की तैयारी करो,नाच-गाने के बारे में बाद में सोचना। प्रिया के बहुत जिद करने पर उसकी माँ सहमत हो गई,लेकिन उन्होंने प्रिया के सामने एक शर्त रख दी कि,पहले प्रिया पढ़ाई करेगी और उसके बाद वह नृत्य पर ध्यान देगी।
वह खूब मेहनत और लगन से प्रतियोगिता की तैयारी करने लगी। अभी प्रतियोगिता आयोजित होने में चार दिन शेष थे।
बाहर बारिश हो रही थी। उसकी सहेलियाँ बाहर पानी में खेल रही थीं,प्रिया भी खेलना चाहती थी,लेकिन माँ ने उनको समझाया कि तुम बीमार पड़ सकती हो और अभी तुम्हारी परीक्षा और नृत्य प्रतियोगिता दोनों है। इसलिए अभी तुम्हें पानी में नहीं भीगना चाहिए। प्रिया ने माँ की चेतावनी को नजरअंदाज किया और अपनी सहेलियों के साथ खेलने चली गई। उसकी सभी सहेलियों ने बारिश में खेलना शुरू कर दिया,वह भी उन सभी में शामिल हो गई। खेलते-खेलते प्रिया का पैर फिसल गया और वह गिर गई ,उसके पैर में बहुत दर्द हो रहा था। प्रिया ने उठने की कोशिश की,लेकिन उससे उठा नहीं जा रहा था,दर्द भी बहुत हो रहा था,शायद पैर की हड्डी टूट गई थी। प्रिया की सहेली ने उसकी माँ को फोन किया। माँ ने प्रिया को देखा,पर कुछ कहा नहीं और न ही डांटा। वे तुरंत उसे चिकित्सक के पास ले गई।चिकित्सक ने कहा कि,पैर में मोच आ गई है।प्रिया कुछ दिन में ठीक हो जाएगी,लेकिन उसे आराम की सख्त जरूरत है। पैर पर जोर नहीं डालना है।
नृत्य प्रतियोगिता केवल ४ दिन बाद थी,पर प्रिया सिर्फ ४ दिन में ठीक नहीं हो सकती। तब प्रिया घर आई और सीधे अपने कमरे में गई,क्योंकि वह बहुत दुखी थी। उसने कमरे में बैठकर सोचा कि उसने माँ की बात न मान कर कितनी बड़ी गलती की। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी और और नृत्य प्रतियोगिता की तैयारी जारी रखी।
प्रिया ने ठान लिया था कि,उसे प्रतियोगिता में अवश्य भाग लेना है। कठिन अभ्यास के बाद उसे मंच पर कदम रखने का मौका मिला। सभी उत्सुक थे कि,कैसे प्रिया अपने घायल पैर के साथ नृत्य करती है। प्रदर्शन के बाद हर कोई हैरान था,नृत्य सुंदर किया गया था और प्रिया के जुनून ने इसे और भी अद्भुत बना दिया। प्रिया प्रथम पुरस्कार तो नहीं जीत सकी,लेकिन फिर भी उसे प्रोत्साहन पुरुस्कार दिया गया ।
इतनी बड़ी प्रतियोगिता में पुरुस्कार लेते समय अचानक प्रिया को अपनी दादी की बात याद आ गई कि,हमें कुछ पाने के लिए कुछ खोना ही पड़ता है। काश! प्रिया ने उस दिन अपनी माँ की बात मान ली होती और बारिश में खेलने ना गई होती तो उसे प्रथम पुरस्कार भी मिल सकता था। अब उसे अपनी दादी और माँ की पूरी बात समझ आ गई। वह पुरस्कार ले घर की ओर चल पड़ी,।तथा तय किया कि,अब वो ऐसी गलती कभी नहीं दोहराएगी।

परिचय-अलीशा सक्सेना का जन्म १अगस्त २००६ को इंदौर(म.प्र.) में हुआ है। वर्तमान में इंदौर में ही स्थाई डेरा है। फिलहाल निजी विद्यालय में कक्षा ८ में अलीशा अध्ययनरत है। सामाजिक गतिविधि के अंर्तगत शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार सीखने में सक्रियता है। अनेक रचनाएं बाल पत्रिका एवं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। जीव-जंतु और आसपास की घटनाओं से प्रेरित होकर लेखन करने में अग्रणी अलीशा की लेखन विधा-कहानी,कविता और लघुकथा है। शिक्षा के साथ खेलकूद एवं अन्य प्रतियोगिताओं में अग्रणी अलीशा को विद्यालय में कईं सम्मान प्राप्त हुए हैं। लेखनी का उद्देश्य-मन के भावों को अभिव्यक्ति देना है।

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