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रोज रोज घटती घटनाएँ

डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)

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रोज रोज घटती घटनाएँ,
                   कैसी ये मानवता है।
नरपिशाच बन बैठा मानव,
              करता वह दानवता हैll 
 
 
जिस पावन धरती पर नारी,
                 देवी सम पूजी जाती।
उसी धरा पर आज बेटियां,
               रोज-रोज मारी जातीll 
 
 
नरपिशाच खूँखार भेड़िये,
                  रोज खुले में घूम रहे।
बेटियाँ बन रही शिकार हैं,
           हम जा रहे चुपचाप सहेll 
 
 
हर दिन अखबारों में होती,
              दुष्कर्म की इक कहानी।  
पढ़कर ना ही खून खौलता,
            बन चुका रक्त भी पानी।।
 
 
नारी अस्मत से खेल रहा,
           क्यों नर दानव बन जाता।
देखकर हैवानियत यही,
           सिसक रही भारत माताll 
 
 
आज के इस वातावरण में,
                  नहीं सुरक्षित है बेटी।
माँ की प्यारी राजदुलारी,
                नहीं सुरक्षित है बेटीll 
 
 
दानवता व हैवानियत की,
                अब पराकाष्ठा हो गई।
अब मिट गई इंसानियत भी,
                क्षमा दया दूर हो गईll 
 
 
हर इक बेटी न्याय मांगती,
         उसको न्याय न मिल पाया।
घूम रहे खूँखार दरिंदे,
             सदा रहे भय का सायाll 
 
 
उठो जगो अब चुप मत बैठो,
                 बेटी का सम्मान करो।
जो देखे उसकोआँख उठा,
        उसका अब अवसान करोll 
 
 
जागृत हुई नारी शक्ति तो,
              भीषण महाप्रलय होगा।
फिर नारी होगी रणचंडी,
               भू पर दुष्टदलन होगाll 
 
 
काली दुर्गा का रूप धरे,
                रक्तबीज मिट जाएगा।
फिर ना होगी शोषित बेटी,
                 कोई ना बच पाएगाll 

परिचयपेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा)डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बांदीकुई (राजस्थान) में जन्मे डॉ.सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी., साहित्याचार्य,शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ व्याख्यात्मक पुस्तक प्रकाशित हैं। कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। आपका साहित्यिक उपनाम ‘नवनीत’ है। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो 
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’

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