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प्रीत हमें जता जाना

बोधन राम निषाद ‘राज’ 
कबीरधाम (छत्तीसगढ़)
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(रचना शिल्प:८ वर्ण १३ मात्रिक,मापनी-२११ २१२ २२)

साजन जिंदगी मेरी।
है अब बन्दगी तेरी॥
गीत मुझे सुना जाना।
आप नहीं भुला जाना॥

बादल सा घना छाया।
प्रीत यहाँ मुझे लाया॥
राग मल्हार प्यारा है।
जीवन गीत न्यारा है॥

यार नहीं सता जाना।
प्रीत हमें जता जाना॥
फूल कली खिलाना है।
प्यार तुम्हें सिखाना है॥