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रच दे एक नयी महाभारत

संजय गुप्ता  ‘देवेश’ 
उदयपुर(राजस्थान)

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अब सहनशीलता से परे है,चीन पाक की ये शरारत
यूँ चुप बैठे रहना भी नहीं है,ये तो हमारी विरासत,
कृष्ण की गीता सुनने का,अब वो समय खत्म हुआ
उठ अर्जुन तू धनुष उठा,रच दे एक नयी महाभारत।

शांति-भाइचारे को दुश्मन समझ बैठे जब कायरता
बुझा राख में छुपी चिंगारी की,आग लगाने की आदत,
जो बीत गया सो बीत गया,इतिहास हुआ है अतीत
भारत को सिरमौर बनने की,लिख दे ये नयी इबारत।

थल कांपेगा,नभ गरजेगा,जल में आहट प्रलय की,
भारत के वीरों संघर्ष करो,देश ने दे दी तुम्हें इजाजत।
‘देवेश’ कह रहा है बातें,वर्तमान को ठीक करने की,
ये बिगड़ा तो आती पीढ़ियाँ,हमको देंगी बहुत लानत॥

परिचय–संजय गुप्ता साहित्यिक दुनिया में उपनाम ‘देवेश’ से जाने जाते हैं। जन्म तारीख ३० जनवरी १९६३ और जन्म स्थान-उदयपुर(राजस्थान)है। वर्तमान में उदयपुर में ही स्थाई निवास है। अभियांत्रिकी में स्नातक श्री गुप्ता का कार्यक्षेत्र ताँबा संस्थान रहा (सेवानिवृत्त)है। सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप समाज के कार्यों में हिस्सा लेने के साथ ही गैर शासकीय संगठन से भी जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता,मुक्तक एवं कहानी है। देवेश की रचनाओं का प्रकाशन संस्थान की पत्रिका में हुआ है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-जिंदगी के ५५ सालों के अनुभवों को लेखन के माध्यम से हिंदी भाषा में बौद्धिक लोगों हेतु प्रस्तुत करना है। आपके लिए प्रेरणा पुंज-तुलसीदास,कालिदास,प्रेमचंद और गुलजार हैं। समसामयिक विषयों पर कविता से विश्लेषण में आपकी  विशेषज्ञता है। ऐसे ही भाषा ज्ञानहिंदी तथा आंगल का है। इनकी रुचि-पठन एवं लेखन में है।

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