तुम्हारा प्रेम

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** तुम्हारा प्रेम श्वांसों में मेरे हरदम धड़कता है,मिला जो था वहां अनुभव,होंठों पर फड़कता है।कहूँ शब्दों में कैसे मैं,मिला जो था वहां मुझको- वो मेरे मन में रहकर प्यार से हरदम महकता है॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व … Read more

भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय आपातकाल

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* २५ जून १९७५-यह तारीख भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में काला धब्बा हैI इस दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया था,जो २१ मार्च १९७७ तक यानि २१ महीने तक चलाI क्यों लगा आपातकाल और क्या रहा उसका असर ? आपातकाल की घोषणा कानून व्यवस्था बिगड़ने,बाहरी आक्रमण और वित्तीय … Read more

दूर बैठे हैं

शिवेन्द्र मिश्र ‘शिव’लखीमपुर खीरी(उप्र)**************************************************** स्वयं दिल के ही हाथों हम हुए मजबूर बैठे हैं,तुम्हारे इश्क में हम भी हुए मशहूर बैठे हैं।‘कोरोना’ से कहीं हम-तुम प्रभावित हो नहीं जाएं- मुहब्बत है सनम तुमसे,तभी हम दूर बैठे हैं॥ परिचय- शिवेन्द्र मिश्र का साहित्यिक उपनाम ‘शिव’ है। १० अप्रैल १९८९ को सीतापुर(उप्र)में जन्मे शिवेन्द्र मिश्र का स्थाई व … Read more

ग्रहों का असर-हमारे जीवन पर

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* कहा जाता है कि ग्रह,नक्षत्र और राशि हमारे जीवन पर और प्रकृति पर भी असर डालते हैं। तब प्रश्न यह उठता है कि बहुत दूर पर स्थित ग्रह-नक्षत्र कैसे हमारे जीवन पर असर डालते हैं। अति व्यग्रता से हम सुबह अखबार का इंतजार करते हैं और आ जाने पर … Read more

पिता की यादें

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** ‘पिता दिवस’ २१ जून विशेष यह मेरी नियति की मुझे मेरे पिता का प्रेम बहुत लंबे समय नहीं मिल पाया,आज जब में उम्र के इस दौर से गुजर रही हूँ तो पिता के साथ की आवश्यकता महसूस होती है। पिता की यादें मेरे हृदय में कई दफा उभरती हैं।हालांकि,मेरे पिता आज … Read more

मैं मज़दूर बोल रहा हूँ…

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** आज चारों ओर मेरे ही नाम का शोर है,मेरे प्रति शाब्दिक संवेदनशीलता सोशल मीडिया पर गूँज रही है,सिर्फ मोबाइल की काला पर्दा ही नहीं,आपके घरों दीवारों पर लटका काला पर्दा भी आजकल मेरे पैरों के छाले दिखा रहा है…ट्राली बैग पर लेटे मेरे बच्चे को मेरी बीवी लंगड़ाते हुए खींचे चली … Read more

वरिष्ठों की त्रासदी-कैसे उबरें!

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* ‘वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।तथा शरीराणि विहाय जीर्णा- न्यन्यानि संयाति नवानि देही॥ भावार्थ-जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे नए वस्त्रों को ग्रहण करता है,वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नए शरीरों को प्राप्त होता है।’ (श्रीमद्भगवद्गीता २/२२)‘कोरोना’ महामारी के चलते चार बार … Read more

रिश्ते-मर्यादा व खूबसूरती से निभाना सीखो

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)******************************************************************* ‘मर्यादा’ एक व्यक्तिगत और भावनात्मक सीमा है। यह मनोवैज्ञानिक ढाल के रूप में काम करती है। इस सीमा के पैमाने पर ही हम अच्छे और संतुलित निजी-सामाजिक दोनों तरह के रिश्ते बनाते हैं।शिशु,जन्म के साथ ही अनेक रिश्तों के बंधन में बंध जाता है और माँ-पिता,भाई-बहन,दादा-दादी,नाना-नानी जैसे अनेक रिश्तों को जीवंत … Read more

दूरी

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’इन्दौर(मध्यप्रदेश)***************************************************************** दूरियों का पता जब चलता हैजब हम कुछ देर उस रिश्ते पर ठहरते हैं।दूरियाँ दूर भले ही करती हो,पर कुछ तस्वीरों के धुंधलेपन कोसाफ भी कर जाती है।कई दफा पास रहने पर,कुछ रिश्ते साफ दिखाईनहीं देते हैं,क्योंकि हमेशा किसी का साथनिश्चितता को ही जन्म नहीं देता,अपने साथ अनिश्चितता भी ले आता … Read more

नैसर्गिक न्याय

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)********************************************************************* घने पेड़ों के झरमुट में बसा हुआ अकीलपुर गाँव,अपनी शोभा,रहन-सहन में अकेला था। नदी किनारे बसा हुआ,हरे-भरे ब़ागों से घिरा हुआ,जरूरत पूरी करने के लिए बंसवाड़ी भी लगी हुई!लहलहाते खेतों की चादर बिछाए।‌जवान लोग तो कमाने दूर-दूर पंजाब, हरियाणा,दिल्ली,राजस्थान,मुंबई तो चेन्नई तक चले गये थे और जो बाहर जाने … Read more