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भारत की बेटियाँ

डाॅ. मधुकर राव लारोकर ‘मधुर’ 
नागपुर(महाराष्ट्र)

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सदियों से,सम्मानित रही हैं,
इस भारत देश,की बेटियां।
धैर्य,शौर्य,गुणों की खान रही,
इस भारत देश,की बेटियाँ॥

इतिहास भरा,पड़ा है हमारा,
बेटियों के कारनामों,से भरपूर।
चली हैं काँधे से,काँधा मिलाकर,
पुरूषों के,साबित किया खुद को भरपूर॥

परंतु आज,विपरीत है स्थिति,
बदली है,समाज की दूषित सोच।
बेटियों के साथ,हो रहा कैसा,
अमानुषिक व्यवहार,घृणित सोच॥

अपराध,उत्पीड़न,बलात्कार,
बेटियों के साथ,हो रहा चहुंओर।
मनीषा,प्रियंका,दामिनी,निर्भया,
अस्मिता की रक्षा हेतु,आवाज उठती सभी ओर॥

असहाय, विवशता पर,आँसू बहाती,
है भारत की,बेटियाँ आज।
जो रक्षक हैं,वही भक्षक बनें,
वज़ूद को तरसती,बेटियाँ आज॥

चीत्कार कर पूछ रही,सभी से,
ये भारत की,सभी बेटियाँ।
पुरूष द्वारा बनाए,इस समाज में,
पहचान कब पाएंगी भारत की बेटियाँ॥

परिचय-डाॅ. मधुकर राव लारोकर का साहित्यिक उपनाम-मधुर है। जन्म तारीख़ १२ जुलाई १९५४ एवं स्थान-दुर्ग (छत्तीसगढ़) है। आपका स्थायी व वर्तमान निवास नागपुर (महाराष्ट्र)है। हिन्दी,अंग्रेजी,मराठी सहित उर्दू भाषा का ज्ञान रखने वाले डाॅ. लारोकर का कार्यक्षेत्र बैंक(वरिष्ठ प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त)रहा है। सामाजिक गतिविधि में आप लेखक और पत्रकार संगठन दिल्ली की बेंगलोर इकाई में उपाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-पद्य है। प्रकाशन के तहत आपके खाते में ‘पसीने की महक’ (काव्य संग्रह -१९९८) सहित ‘भारत के कलमकार’ (साझा काव्य संग्रह) एवं ‘काव्य चेतना’ (साझा काव्य संग्रह) है। विविध पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी को स्थान मिला है। प्राप्त सम्मान-पुरस्कार में मुंबई से लिटरेरी कर्नल(२०१९) है। ब्लॉग पर भी सक्रियता दिखाने वाले ‘मधुर’ की विशेष उपलब्धि-१९७५ में माउंट एवरेस्ट पर आरोहण(मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व) है। लेखनी का उद्देश्य-हिन्दी की साहित्य सेवा है। पसंदीदा लेखक-मुंशी प्रेमचंद है। इनके लिए प्रेरणापुंज-विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन(नागपुर)और साहित्य संगम, (बेंगलोर)है। एम.ए. (हिन्दी साहित्य), बी. एड.,आयुर्वेद रत्न और एल.एल.बी. शिक्षित डाॅ. मधुकर राव की विशेषज्ञता-हिन्दी निबंध की है। अखिल भारतीय स्तर पर अनेक पुरस्कार। देश और हिन्दी भाषा के प्रति विचार-
“हिन्दी है काश्मीर से कन्याकुमारी,
तक कामकाज की भाषा।
धड़कन है भारतीयों की हिन्दी,
कब बनेगी संविधान की राष्ट्रभाषा॥”

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