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‘वापस तो आओगे न दोस्त…?’ एक नायक ऐसा भी…

डॉ. स्वयंभू शलभ
रक्सौल (बिहार)

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इस ‘कोरोना’ काल में लोगों की पीड़ा और परेशानियों की अनगिनत तस्वीरों के बीच कुछ ऐसी भी तस्वीरें आईं जिन्होंने तपती रेत पर बारिश की नर्म बौछार कर दी…लोगों के चेहरे खिल गए…मुसीबत से लड़ने की नई ताकत मिल गई…।
एक अभियंता से अभिनेता बने सोनू सूद को ‘दबंग,अरुंधति और डुकुडु’ (तेलुगु) और ‘चंद्रमुखी’ (तमिल) फिल्मों में खलनायक के रूप में दर्शकों ने खूब पसंद किया…जब भी वे किसी रियलिटी शो या कॉमेडी शो में आए, दर्शकों ने उनसे शरीर (सिक्स पैक एब्स) दिखाने की जिद नहीं छोड़ी…संकोच और सकुचाहट के साथ सोनू ने अपनी शर्ट उतारी…दर्शकों ने जमकर तालियां और सीटियां बजाई… ग्लैमर के पीछे भागती नौजवान पीढ़ी उनकी देह भाषा की दीवानी बनी रही…लेकिन आज जब वह इंसान मजदूरों को अपने अपने घर भेजने की जिद ठानकर सड़क पर उतरा तो उसके संवेदनशील हृदय को पूरे देश ने देखा…। उसके जज्बे को पूरे देश ने सलाम किया,और देखते देखते रील जिंदगी का खलनायक असली जिंदगी का महानायक बन गया…
दिखावे और श्रेय लेने वालों की भीड़ से अलग सोनू सूद के शब्दों ने हर भारतीय के कानों में रस घोल दिया…’पैदल क्यों जाओगे दोस्त…लो इंतजाम हो गया…वापस तो आओगे न दोस्त…?’
सोनू सूद कहते हैं…’जिन मेहनतकशों ने हमारे घर बनाए,सड़कें बनाईं..हम उन्हें बेघर सड़कों पर नहीं देख सकते…।’
ऐसे हालात कैसे बने…कौन जिम्मेदार है…इसकी बहस में पड़े बिना सोनू सूद ने वह काम किया,जो हर सक्षम और सच्चे राष्ट्रभक्त को करना चाहिए। संकट के समय जरूरतमंद और लाचार लोगों की मदद से बढ़कर दूसरा कोई राष्ट्रधर्म नहीं होता…।
सोनू सूद को आज हजारों लोगों के दिलों से निकली दुआएं मिल रही हैं..ये सही मायनों में नायक हैं…वही किया जो दिल ने कहा…भाव भी पवित्र था, इरादा भी…और देखिए कैसे देश के तमाम लोगों ने भी सोनू सूद को अपने सिर-आँखों पर बिठा लिया…आपके जज्बे को नमन।
ईश्वर की मेहर सोनू पर बनी रहे…और इसी तरह जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते रहें…। आज देश और समाज को सोनू सूद जैसे नायकों की जरूरत है…।

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