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योग महाशक्ति

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’
रावतसर(राजस्थान) 
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दिन भर थका हुआ प्राणी घर आकर के विश्राम करे,
तन को रखने स्वस्थ सदा भोजन सुबह और शाम करे।
यही सही है दुनिया में तो जीवन है अनमोल बहुत,
साँसें कायम रखने को फिर क्यों ना प्राणायाम करे ?

योग करेगा सुबह-शाम वो सुख का जीवन पाएगा,
अंदर से मज़बूत बने शत् वर्ष वो आयु पाएगा।
‘कोरोना’ है महाकाल हम योगी हैं तो फ़िक्र नहीं,
योग ही है जीवन शक्ति जो नहीं किया पछताएगा।

लड़ने में सक्षम ही नहीं क्या होगा उसका हाल कहो,
ईश्वर की इस अमूल्य निधि को कभी बचा ना पाएगा।
खो देगा अपना जीवन जिसको मुश्किल से पाया है,
वादे करके आया घर से कैसे उन्हें निभाएगा।

कर अनुलोम विलोम भस्रिका कपालभाति लंबी साँस,
शारीरिक व्यायाम जरूरी निकल जाय सब तन की फाँस।
है मुकाबला कोरोना से हमें नहीं घबराना है,
अगर डर गए उससे सुन लो वो भारी पड़ जाएगा।

योग प्राणायाम करोगे स्वास्थ रहेगा जीवनभर,
खाली रहना है घर में जो करेगा वो बच जाएगा।
योग महाशक्ति है प्यारे इसका कोई जोड़ नहीं,
ये पतँजलि का कहना है जो नहीं किया पछताएगा॥

परिचय-शंकरलाल जांगिड़ का लेखन क्षेत्र में उपनाम-शंकर दादाजी है। आपकी जन्मतिथि-२६ फरवरी १९४३ एवं जन्म स्थान-फतेहपुर शेखावटी (सीकर,राजस्थान) है। वर्तमान में रावतसर (जिला हनुमानगढ़)में बसेरा है,जो स्थाई पता है। आपकी शिक्षा सिद्धांत सरोज,सिद्धांत रत्न,संस्कृत प्रवेशिका(जिसमें १० वीं का पाठ्यक्रम था)है। शंकर दादाजी की २ किताबों में १०-१५ रचनाएँ छपी हैं। इनका कार्यक्षेत्र कलकत्ता में नौकरी थी,अब सेवानिवृत्त हैं। श्री जांगिड़ की लेखन विधा कविता, गीत, ग़ज़ल,छंद,दोहे आदि है। आपकी लेखनी का उद्देश्य-लेखन का शौक है

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