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इन्सान में साक्षात भगवान समाए 

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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हम अंश है अपने ईश्वर के,
वो तो कण-कण में व्याप्त जगत के
जन जीवन के ह्रदय में वास करते,
मिलते उन्हीं को भगवान, जो भक्ति करते।

जब अंहकार को त्यागें हम अपने,
तभी भगवान हर पल मिलते
प्रेम से ही भगवान मिलते, 
सेवा से अन्तर मन शुद्ध होते।

जब हम सेवा करते मन से जग की,
किसी का दु:ख-दर्द महसूस करते दिल से
भक्ति मिलती ही है सेवा से,
जो परमार्थ करते दिल से।

उन्हीं के दिल में ईश्वर वास करते,
दूसरे के प्रति दया, ममता, त्याग और परोपकार की जो भावना रखें,
इन्सान वही साक्षात भगवान का स्वरूप होते।

धरती पर गुरु ही साक्षात भगवान  का स्वरूप होते,
कृपा दृष्टि उनकी पर्याप्त मानव के दिल में रहते
वो जैसा चाहे बना सकते,
वो भगवान का ही प्रतिरूप होते।

अपने सारे गुणों को देते गुरु पल में,
पर गुरु वो हो जो श्रोत्रिय ब्रह्म निष्ठ हों।
काश! मिल जाए दुनिया में ऐसा कोई,
इन्हीं में साक्षात भगवान समाए रहते॥