ममता साहू
कांकेर (छत्तीसगढ़)
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हर परिस्थिति में थाम ले,
ऐसा हाथ चाहिए
झूठ का असर नहीं,
सच का साथ चाहिए।
किसी की बातों का,
अब नहीं कोई भरोसा
हर सौदे के लिए,
कागजी प्रमाण चाहिए।
झूठ का है बोलबाला,
सच नहीं कोई सुनने वाला
अब आवाज कर बुलंद,
नवनिर्माण चाहिए।
भ्रष्टाचार का फैला जाल,
कौन करेगा सवाल…?
हर गुत्थी को सुलझाने,
अब नया बवाल चाहिए।
शोषण के विरुद्ध चीख सके,
वह स्वर साज चाहिए।
हर झूठ का उतार दे नक़ाब,
क्रांतिकारी एक आगाज़ चाहिए॥