प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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कैसा यह संसार रे मनवा, कैसा यह संसार।
जिनके आगे दु:खड़ा रोवे नहीं, करेंगे वो उपकार।
अच्छा बुरा सब सह जा प्यारे, नाम प्रभु का लेके तू,
धीर – धरम और नाम प्रभु से ही होगा तेरा उद्धार।
नहीं लगाइयो हेत किसी से, पीछे ना पछताना हो,
मोह के बंधन मन के टुकड़े, नहीं करेंगे बारंबार।
अपने – अपने खाते लेकर पाप-पुण्य के आए सब,
जिनके लिए अधर्म करेगा, देंगे वही जी ठोकर मार।
जीवन की हर सुविधा में हर दुविधा में प्रभु चिंतन हो,
चिंताओं से सफ़र चिता का, बड़ी सरलता से हो पार।
बेबस दुःख में क्यों मैं रोऊं, बरबस सुख में हँसना क्या,
कदम-कदम है संभल के चलना, सुख-दुःख में पड़ना बेकार।
आज अभी से पूर्ण समर्पित शरणागति प्रभु की लेती,
परम हितैषी वे भक्तों के हृदय से करती यह स्वीकार।
समय प्रभु को दे दूं सारा धन चाहे दुनिया को दूं,
अपनापन बस एक उन्हीं से, वही करेंगे बेड़ा पार।
धन्य भाग उनके हो जाते बस जिनके मन में प्रभु प्रेम,
राजाओं के ताज उतरते हैं चरणों में फिर हर बार।
कैसा यह संसार रे मनवा, कैसा यह संसार।
जिनके आगे दु:खड़ा रोवे, नहीं करेंगे वो उपकार॥