सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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घर का उजाला… बेटियाँ (राष्ट्रीय पुत्री दिवस विशेष)….
बिटिया पाखी बिटिया साखी,
बिटिया भाई की चुलबुल राखी
बिटिया सच्ची सहेली होती,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
सचमुच बिटिया सयानी होती,
सबपर स्नेह भर-भर लौटाती
हर काम में हाथ बंटाती,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
चलती जब ठुमक-ठुमक कर,
घर में खूब रौनक होती
मीठी-मीठी तान सुनाकर,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
सबकी निगाहें थम-सी जाती,
दौड़-भाग जब लाड़ली करती
सबकी फ़िक्र बेटियाँ करतीं,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
बेटियों से संसार चहकता,
बिन बेटी न आँगन महकता
लक्ष्मी घर की बेटीयां होती,
घर का उजाला बेटियाँ होती ।
सुसंस्कृत संस्कारित बेटी होगी,
ख्याति दो कुलों की होगी
माँ का आयना बेटी होती,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
भ्रूण में ही जो मार गिराते,
पग बेटी के कभी न पाते
कदर जिस घर बेटीयों की होती,
घर का उजाला बेटियाँ होती।
आज घर-घर बहु को तड़पते,
क्योंकि बेटे बिन ब्याहे फिरते।
निशि-दिन चित न सुखवह,
चिन्ता ‘हिम’ आज की भयावह॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।