सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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यशोदा दुलारा है वो,
नंद जी का प्यारा है वो
घूम-घूम ब्रज गली,
माखन चुराता है।
कैसे मैं मनाऊँ उसे,
कैसे समझाऊँ उसे
भागे इधर-उधर,
हाथ नहीं आता है।
निशाना साध करके,
कंकड़ी मार करके
गोपियों की मटकी को,
तोड़ भाग जाता है।
कैसे समझाऊँ उसे,
कैसे मैं मनाऊँ उसे।
जितना वो खाता नहीं,
उतना गिराता है॥