राधा गोयल
नई दिल्ली
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था वो अमर बलिदानी (वीर भगत सिंह जयंती विशेष)…
भगतसिंह था भारत माँ का अमर वीर बलिदानी,
भारत माँ को आजाद कराने की थी मन में ठानी
पिता किशनसिंह, माता विद्यावती का वीर सपूत,
भगतसिंह था नाम, आजादी का जज़्बा मजबूत
छोटी वय में देश की रक्षा के हित हुआ शहीद,
इतिहासों में सदा अमर हो जाते ऐसे वीर।
बी.ए. की पढ़ाई छोड़कर असहयोग आंदोलन में भाग लिया,
लाला लाजपत राय के साथ साइमन कमीशन का विरोध किया
अंग्रेजों ने उन सब पर बुरी तरह से लाठीचार्ज किया,
लाठियों के आघात से लाला लाजपत राय का निधन हुआ
उनकी मौत का बदला लेने का मन में संकल्प किया।
अंग्रेज पुलिस अधिकारी स्काॅट को मारने का प्लान बनाया,
पर गलती से साण्डर्स गोली लगने से मर गया
खुद को बचाने के लिए भगतसिंह लाहौर चले गये,
पुलिस ने उन्हें पकड़ने को चारों तरफ अपने जाल बिछा दिये
उनसे बचने को भगत ने दाढ़ी बाल कटवा लिये,
कोई भी पहचान न पाया, पुलिस से खुद को बचा सके।
चन्द्रशेखर, सुखदेव राजगुरू के साथ मिल के धमाका एक किया,
अप्रैल १९२९ में बटुकेश्वर के साथ असेम्बली में बम विस्फोट किया
इस बम में विस्फोटक नाम का कोई पदार्थ नहीं था,
फटने पर आवाज ही होती, खाली जगह में फेंका गया था
और उसे फेंकने के बाद वो भागे नहीं वहाँ से,
स्वयं ही दोनों हाथ बढ़ा खुशी-खुशी दे दी गिरफ्तारी।
देख बहादुरी उनकी, चकित रह गई असेम्बली सारी,
भगतसिंह के नाम की दुनिया भर में गूँज हुई भारी
२ साल जेल में रहे और कैदियों के अधिकारों के लिए,
एक सौ सोलह दिनों तक भूख हड़ताल की
भगतसिंह की देशभक्ति जन-जन में ज्वाला जगा रही।
“अंग्रेजों से माफी माँग लो”, गाँधी जी ने बात कही,
किन्तु स्वाभिमानी को यह मंजूर नहीं था
उनके कृत्य से कोई हताहत नहीं हुआ था,
जनता में आक्रोश बहुत था, यह जानकर
निर्धारित दिन से एक दिन पहले ही शाम के समय,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु को फाँसी दे दी।
पिछले दरवाजे से रावी तट पर उनके शवों की दाहक्रिया की,
लोगों को जब पता लगा तो वहीं पे भागे
अधजली लाशें पानी में फेंक कर अंग्रेज भागे,
तीनों बहादुरों के शरीर को नदी में से ढूँढ कर
भीगे नयनों से श्रद्धापूर्वक, तीनों का अन्तिम संस्कार किया।
देश की खातिर शहीद होकर अमर हो गए वीर सपूत,
भारतमाता गर्वित होती, पाकर ऐसे वीर सपूत॥