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समय नहीं है

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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यात्राएँ आसान हो गईं,
सफ़र का समय भी कम हो गया
फिर भी इंसान के पास समय नहीं…।

परिवार छोटे हो गए,
‘हम दो और हमारे दो’ बस रह गए
फिर भी इंसान के पास समय नहीं…।

ख़बर अब आसान हो गई,
हफ़्ते में पहुँचने वाला संदेश सेकंड में मिल जाता
फिर भी इंसान के पास समय नहीं…।

रसोई अब बदल गई,
चूल्हे की जगह गैस, सिल की जगह मिक्सी आ गई,
फिर भी इंसान के पास समय नहीं…।

कपड़े धोना समाप्त,
वाशिंग मशीन का बटन दबाना बस
पर
फिर भी इंसान के पास समय नहीं…।

अपनों के पास बैठने का,
अपने मन की बात सुनने का बिल्कुल समय नहीं है।

जरा सोचिए, इस पर विचार करिए,
ऐसे ही समय हाथ से फिसल जाएगा और
हम कहते रह जाएँगे कि समय नहीं है॥