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सृजन-यात्रा के स्वर्णिम सोपान पर हुई २५०वीं कल्पकथा काव्य गोष्ठी

सोनीपत (हरियाणा)।

हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में साहित्य-साधना की अविरल परंपरा का एक गौरवशाली पड़ाव २५०वीं साप्ताहिक आभासी काव्यगोष्ठी के रूप में अत्यंत हर्ष, और भावपूर्ण वातावरण में सफलतापूर्वक पार हुआ। यह आयोजन संस्था की निरंतर सृजनशील यात्रा का स्वर्णिम अध्याय बन साहित्यप्रेमियों के मानस में विशेष स्थान बना गया।
संस्था की संवाद प्रभारी ज्योति राघव सिंह के अनुसार आयोजन का संचालन पवनेश मिश्र द्वारा अत्यंत प्रभावशाली रूप से किया गया। अध्यक्षता डॉ. रामावतार मेघवाल (सागर) ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ओंकार साहू मृदुल की गरिमामयी उपस्थिति रही। शुभारंभ विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत गुरु, गणेश एवं सरस्वती की वंदना से हुआ। उनके मधुर स्वर ने समस्त वातावरण को साहित्यिक ऊर्जा से अनुप्राणित कर दिया। इस अवसर पर देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित सृजनकारों-अमित पण्डा ‘अमिट रोशनाई’, पं. अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, प्रमोद पटले, नैन्सी श्रीवास्तव, बिनोद कुमार पाण्डेय, मेघा अग्रवाल, रमापति मौर्य, कु. अलका शर्मा, अंजनी कुमार चतुर्वेदी श्रीकांत, सांद्रा लुटावन गणेश, श्रीमती राधाश्री शर्मा एवं पवनेश मिश्र ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं की प्रस्तुति देकर गोष्ठी को स्मरणीय बना दिया।

आपने बताया कि कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन उत्साह के साथ किया गया। समापन अवसर पर संस्थापक राधाश्री शर्मा द्वारा आभार ज्ञापित किया गया।