बेशर्म

बाबूलाल शर्मा
सिकंदरा(राजस्थान)
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बेशर्म
कपूत औलाद,
माँ-बाप लज्जित
रह जाते
निपूते।

लजाया
दूध वंश,
धर्म संस्कृति समाज
जिन्दा क्यों
कुकर्मी।

जीवन
कलंकित कर,
जीने से बेहतर
मर जाते
भेड़िए।

भेड़िए
शर्मिंदा होते,
मानवी करतूत सुन
शहर गाँव
जंगली।

नालायक
नराधम नपुंसक,
बन रहे दुष्कर्मी
कापुरुष स्त्रैण
नरपिशाच।

सुनकर
मर्मान्तक घटना,
बेटियां लुटती मरती
आहत होती
धरती।

अब
कैसे करें
बिटिया का संरक्षण,
माता-पिता
सोचें।

भेड़िए
होवें तो
पकड़ वन भेजें,
दरिंदे दिखते
मानव।

कानून
अन्धा होता,
बच जाते मुजरिम
छल कपट
कर।

समाज
चेतना लाए,
दण्ड दुष्कर्मी को
देना होगा
कठोर।

बिटिया
मजबूत बनो,
करो स्वयं संघर्ष
कृष्ण नहीं
आएंगे।

बना लो
सुदर्शन चक्र,
हर घर बेटियां
बचानी होगी
आबरू।

प्रश्न
मस्तिष्क में,
कौन बेटी लुटी
उत्तर मिले
गरीब।

साँवरे
देखकर दिखाओ,
अन्धी सरकारों को
बेआबरू होती
बेटियां।

खामोश
शासन सरकार,
सुरक्षित खुद रहते
नारी पीड़ा
असहनीय।

परिचय : बाबूलाल शर्मा का साहित्यिक उपनाम-बौहरा हैl आपकी जन्मतिथि-१ मई १९६९ तथा जन्म स्थान-सिकन्दरा (दौसा) हैl वर्तमान में सिकन्दरा में ही आपका आशियाना हैl राजस्थान राज्य के सिकन्दरा शहर से रिश्ता रखने वाले श्री शर्मा की शिक्षा-एम.ए. और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-अध्यापन(राजकीय सेवा) का हैl सामाजिक क्षेत्र में आप `बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ` अभियान एवं सामाजिक सुधार के लिए सक्रिय रहते हैंl लेखन विधा में कविता,कहानी तथा उपन्यास लिखते हैंl शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र में आपको पुरस्कृत किया गया हैl आपकी नजर में लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः हैl

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