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अखंड देश हमारा

सच्चिदानंद किरण
भागलपुर (बिहार)
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अखंड भारत देश है हमारा,
स्वप्न से यथार्थ तक हम हैं
स्वतंत्र भारतवासी विश्व के,
पटल पर सर्वश्रेष्ठ देश का
स्वाभिमानी स्वावलंबन प्रेम का,
दर्शनीय देश है हमारा।

सर्व-धर्म से यथेष्ठ सर्वगुण संपन्न,
धैर्यपूर्ण सौम्य आत्मबल‌ का है
समुचित समन्वय से सशक्त,
स्वरूप में सूर्योत्तम-सा पराक्रम
परिक्रमा कर अद्वितीय प्रबल,
प्राण-प्रतिष्ठा देश है हमारा।

अठारह महापुराण महाग्रंथों के,
संस्कृत रचियता देवर्षि महर्षि
वेदव्यास मुनि की यशकृति के,
जयगान करे ब्रह्मांड-भूतल पर
भारत भूमि के लाल भरत के नाम,
भारत प्रभुत्व देश है हमारा।

‘विद्या ददाति विनय’ से प्रचंड,
ज्योति प्रखर होती हिमालय की
उत्तंग शिखर से गंगा की निर्मल,
शीतल पवित्र जलधारा में मृत्यु।
मौक्ष संग पाप-पुण्य धोती पतित,
पावनी शौर्यता में देश है हमारा॥

परिचय- सच्चिदानंद साह का साहित्यिक नाम ‘सच्चिदानंद किरण’ है। जन्म ६ फरवरी १९५९ को ग्राम-पैन (भागलपुर) में हुआ है। बिहार वासी श्री साह ने इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त की है। आपके साहित्यिक खाते में प्रकाशित पुस्तकों में ‘पंछी आकाश के’, ‘रवि की छवि’ व ‘चंद्रमुखी’ (कविता संग्रह) है। सम्मान में रेलवे मालदा मंडल से राजभाषा से २ सम्मान, विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ (२०१८) से ‘कवि शिरोमणि’, २०१९ में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ प्रादेशिक शाखा मुंबई से ‘साहित्य रत्न’, २०२० में अंतर्राष्ट्रीय तथागत सृजन सम्मान सहित हिंदी भाषा साहित्य परिषद खगड़िया कैलाश झा किंकर स्मृति सम्मान, तुलसी साहित्य अकादमी (भोपाल) से तुलसी सम्मान, २०२१ में गोरक्ष शक्तिधाम सेवार्थ फाउंडेशन (उज्जैन) से ‘काव्य भूषण’ आदि सम्मान मिले हैं। उपलब्धि देखें तो चित्रकारी करते हैं। आप विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य होने के साथ ही तुलसी साहित्य अकादमी के जिलाध्यक्ष एवं कई साहित्यिक मंच से सक्रियता से जुड़े हुए हैं।

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