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ईद मुबारक हो

विजय कुमार
मणिकपुर(बिहार)

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रमजान के महीने में
ईद मुबारक हो,
घर-घर के आँगन में
चन्द्रमा की चाँदनी हो,
ईद मुबारक हो।
रोजेदार को मिले
दुआ बेशुमार हो,
अल्लाह का प्यार हो
रमजान के महीने में,
ईद मुबारक हो।
इफ्तार ही इफ्तार हो
प्रेम का भंडार हो,
मिलने का इंतजार हो
रमजान के महीने में,
ईद मुबारक हो।
गुलदस्ता मेरे पास हो
गुलशन का इंतजार हो,
उपहार ही उपहार हो
रमजान के महीने में,
ईद मुबारक हो।
हिन्दू हो या मुसलमान
सिख हो या ईसाई,
आपस में अटूट प्यार हो।
रमजान के महीने में,
ईद मुबारक हो॥
परिचय-विजय कुमार का बसेरा बिहार के ग्राम-मणिकपुर जिला-दरभंगा में है।जन्म तारीख २ फरवरी १९८९ एवं जन्म स्थान- मणिकपुर है। स्नातकोत्तर (इतिहास)तक शिक्षित हैं। इनका कार्यक्षेत्र अध्यापन (शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में समाजसेवा से जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता एवं कहानी है। हिंदी,अंग्रेजी और मैथिली भाषा जानने वाले विजय कुमार की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक समस्याओं को उजागर करना एवं जागरूकता लाना है। इनके पसंदीदा लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ हैं। प्रेरणा पुंज-खुद की मजबूरी है। रूचि-पठन एवं पाठन में है।