लखनऊ (उप्र)।
यदि पूरे मन से प्रयास किया जाए तो उच्च न्यायालय में भी आदेश और निर्णय हिन्दी में लिखाए जा सकते हैं।
उच्च न्यायालय लखनऊ और उत्तर प्रदेश हिन्दी विधि प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिन्दी दिवस पखवारे की समाप्ति पर हुए कार्यक्रम में यह बात मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने कही। विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, कार्यक्रम संयोजक मो. आरिफ खान रहे। विषय प्रवर्तन उ.प्र. हिन्दी विधि प्रतिष्ठान के प्रादेशिक अध्यक्ष देशरत्न सिन्हा ने किया और सभी को सुन्दर प्रतीक चिन्ह दिए। सभी वक्ताओं ने देश और प्रदेश की राजभाषा हिन्दी के न्यायिक क्षेत्र में अधिकाधिक प्रयोग के मार्ग के वास्तविक अवरोधों को समाप्त करने पर बल दिया। श्री सिन्हा ने कहा कि वो उच्च न्यायालय में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए पिछले ५० वर्ष से अभियान चला रहे हैं और ये सिलसिला लगातार चलता रहे, इसके लिए बहुत से अधिवक्ताओं और न्यायमूर्तिगणों का सहयोग और प्रोत्साहन मिलता रहा है।
श्री पाठक ने कहा कि देश के स्वाधीनता आन्दोलन से लेकर आज तक हर संघर्ष में अधिवक्ताओं का बहुत प्रभावी नेतृत्व रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अभी विधि मंत्रालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के पास है, इसलिए अधिवक्ताओं की आवाज उनके वकील की तरह पहुंचाने का काम करेंगे। वंदे मातरम से प्रारंभ कार्यक्रम जन गण मन के साथ समाप्त हुआ।
(सौजन्य:वैश्विक हिंदी सम्मेलन, मुम्बई)…