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ऐसी क्या गलती की…

संजय जैन 
मुम्बई(महाराष्ट्र)

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दिये तो बहुत थे पर,
जल कुछ और रहा था।
अंधरे में रोशनी,
वो ही कर रहा था।
अब कैसे पता करें हम ?

जिक्र जब भी उनका,
करते अपने दिल में।
याद कुछ और ही,
दिला देता ये दिल।
अब क्या कहोगे इसे,
तुम कुछ तो बता दो।
बात जो पुरानी है उसे,
नई एक बार कर दोll

रास्ते बहुत लंबे हैं,
पर मंजिलें पास हैं।
चलने वालों को सिर्फ,
सही मंजिल का पता हैll

राही ढूंढ ही लेता है,
एक दिन अपने आपको।
क्या था उसके दिल में,
और क्या उसे चाह थीll

जो मिला क्या,
वो काफी है।
या उसकी कुछ,
और ही तलाश है।
बिक जाते हैं,
लोगों के दिल के अरमां।
खरीदने वाले,
बहुत तैयार हैंll

किस-किसको,
दोष दें हम।
अब सभी तो,
अपने जो हैं।
तभी तो सज जाते हैं,
लोगों के दिलों में सपनेll

छोड़ देते हैं,
वो भी साथ।
जो कभी अपने,
हुआ करते थे।
ऐसी क्या गलती की,
जो चले गए छोड़ मझधार में
छोड़ गए मझधार में…ll

परिचय-संजय जैन बीना (जिला सागर, मध्यप्रदेश) के रहने वाले हैं। वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं। आपकी जन्म तारीख १९ नवम्बर १९६५ और जन्मस्थल भी बीना ही है। करीब २५ साल से बम्बई में निजी संस्थान में व्यवसायिक प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। आपकी शिक्षा वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ ही निर्यात प्रबंधन की भी शैक्षणिक योग्यता है। संजय जैन को बचपन से ही लिखना-पढ़ने का बहुत शौक था,इसलिए लेखन में सक्रिय हैं। आपकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अपनी लेखनी का कमाल कई मंचों पर भी दिखाने के करण कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इनको सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के एक प्रसिद्ध अखबार में ब्लॉग भी लिखते हैं। लिखने के शौक के कारण आप सामाजिक गतिविधियों और संस्थाओं में भी हमेशा सक्रिय हैं। लिखने का उद्देश्य मन का शौक और हिंदी को प्रचारित करना है।