राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’
धनबाद (झारखण्ड)
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ओह यह भ्रष्टाचार,
देश की जड़ें खा रहा है
सत्य अब दम तोड़ रहा है,
असत्य सिंहासन पा रहा है।
गरीब की थाली है खाली,
धनी के घर सोने की प्याली
ईमानदार परीक्षा में हैं अटके,
बेईमानी सारे पदों को गटके।
विकास अब फाइलों में अटका,
भ्रष्ट बाबू ने इसे जोर से पटका
ईमानदारी में अभी दम नहीं है,
नेता-मंत्रियों को कोई गम नहीं है।
अस्पताल में दवा नहीं मिलती,
नहीं मिलता विद्यालय में ज्ञान
कब तक सब यहाँ मौन रहेंगे ?
कब लगाएंगे क्रान्ति पर ध्यान ?
उठो नौजवानों चुप्पी तोड़ो,
मत सहो तुम अब अत्याचार
वोट, आवाज और मेहनत से,
अब उखाड़ फेंको भ्रष्टाचार ।
ओह यह भ्रष्टाचार,
अब हम इसे नहीं सहेंगे।
आओ मिलकर शपथ लें,
भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाएंगे॥
परिचय-साहित्यिक नाम `राजूराज झारखण्डी` से पहचाने जाने वाले राजू महतो का निवास झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद स्थित गाँव-लोहापिटटी में है। जन्म तारीख १० मई १९७६ और जन्म स्थान धनबाद है। भाषा ज्ञान-हिन्दी का रखने वाले श्री महतो ने स्नातक सहित एलीमेंट्री एजुकेशन (डिप्लोमा) की शिक्षा प्राप्त की है। साहित्य अलंकार की उपाधि भी हासिल है। आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी (विद्यालय में शिक्षक) है। सामाजिक गतिविधि में आप सामान्य जनकल्याण के कार्य करते हैं। लेखन विधा-कविता एवं लेख है। इनकी लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक बुराइयों को दूर करने के साथ-साथ देशभक्ति भावना को विकसित करना है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-प्रेमचन्द जी हैं। विशेषज्ञता-पढ़ाना एवं कविता लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिंदी हमारे देश का एक अभिन्न अंग है। यह राष्ट्रभाषा के साथ-साथ हमारे देश में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसका विकास हमारे देश की एकता और अखंडता के लिए अति आवश्यक है।