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कम मत समझना पिता के संघर्ष को

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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मेरी असली प्रेरणा…

कम मत समझना पिता के संघर्षों को,
संघर्ष से भरा सारा जीवन ही रहता,
पसीने से भरा शर्ट रहता पिता का।

करते रहते हमेशा अरमान पूरा हमारा,
पिता होते हैं बच्चों की सारी हिम्मत,
हमारी खुशी का सपना, पहचान हमारा।

पिता के होंठों पर मुस्कान हो,
जेब हो खाली फिर भी न कहते कभी
कभी अपनी समस्या बयान नहीं करते।

करते हमेशा पूरा हमारा अरमान,
हम कभी समझते नहीं पिता के ख्वाब
हमारी जीत ही होती उनकी खुशी।

पिता, पिता नहीं, हमारे होंठों की खुशी है,
हमारी होती है पहचान पिता की खुशियों से
हमारे हर कदम पर पिता का होता साथ॥