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कारगिल

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’
रोहतक (हरियाणा)
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कारगिल विजय दिवस स्पर्धा विशेष……….


हीरे हजारों बिखरे टूटी असंख्य माला,
गीले हुए तन कितने देखा सभी ने जाना
अखबारों की भूख बदी थी हर दिन नया चेहरा था,
मकसद वही पुराना,हीरे हजारों…।

रोती है आज मिट्टी रोता हुआ अब गगन है,
टूटी जब खिली कली तो रोया बहुत चमन है
था एक आँख में समंदर,एक आँख में निशाना,
हीरे हजारों बिखरे…।

भीगा हुआ हर मन है और गीला हर नयन है,
एक और प्रिया बिछोह एक और माँ का निजपन है
पर प्रेम को फ़र्ज़ पर कुर्बान करके जाना,
हीरे हजारों बिखरे…।

कितने गए हैं अब तक उन वादियों के पास,
आँखों ने बहुत देखा मन भी हुआ उदास
देखी न भूख उनकी छुई न उनकी प्यास,
चोटियां थी उनकी पल भर का आशियाना, हीरे हजारों…।

आगे थी उनके चोटी साँसों में विषैला धुँआ,
देखा सुना न जाना जो कष्ट उन्हें छुआ
जहां लहराया तिरंगा नहीं शेष था ठिकाना, हीरे हजारों बिखरे…।

विद्रोही की कहानी,निर्मोही की कहानी,
दर्रे-घाटियां कंपाती ललकारती जवानी
लिख सके न कुर्बानी,लिखा जिसने जितना जाना,
हीरे हजारों बिखरे…।

परिचय–डॉ.चंद्रदत्त शर्मा का साहित्यिक नाम `चंद्रकवि` हैl जन्मतारीख २२ अप्रैल १९७३ हैl आपकी शिक्षा-एम.फिल. तथा पी.एच.डी.(हिंदी) हैl इनका व्यवसाय यानी कार्य क्षेत्र हिंदी प्राध्यापक का हैl स्थाई पता-गांव ब्राह्मणवास जिला रोहतक (हरियाणा) हैl डॉ.शर्मा की रचनाएं यू-ट्यूब पर भी हैं तो १० पुस्तक प्रकाशन आपके नाम हैl कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हुई हैंl आप रोहतक सहित अन्य में भी करीब २० साहित्यिक मंचों से जुड़े हुए हैंl इनको २३ प्रमुख पुरस्कार मिले हैं,जिसमें प्रज्ञा सम्मान,श्रीराम कृष्ण कला संगम, साहित्य सोम,सहित्य मित्र,सहित्यश्री,समाज सारथी राष्ट्रीय स्तर सम्मान और लघुकथा अनुसन्धान पुरस्कार आदि हैl आप ९ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हो चुके हैं। हिसार दूरदर्शन पर रचनाओं का प्रसारण हो चुका है तो आपने ६० साहित्यकारों को सम्मानित भी किया है। इसके अलावा १० बार रक्तदान कर चुके हैं।