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कालिदास ने सिद्ध किया कि प्रेम लौकिक जीवन की वस्तु नहीं-डॉ. सिंह

देहरादून (उत्तराखंड)।

कालिदास सही मायने में पूरे संसार में श्रृंगार के महाकवि के रूप में देखे जाते रहे हैं। वे अपनी अद्भुत रचनाओं से भारत के महान कवि तथा नवरत्न कवि के रूप में प्रसिद्ध रहे। कालिदास ने अपनी रचनाओं में लोक जीवन को समुचित रूप से उतारा और उनका लोक व्यवहार भी उत्कृष्ट है। कालिदास ने सिद्ध किया कि प्रेम लौकिक जीवन की वस्तु नहीं है।
       मुख्य वक्ता डॉ. राम विनय सिंह ने अपने विस्तृतपूर्ण संबोधन में यह बात कही। अवसर रहा देव संस्कृति एवं पुरातत्त्व और शोध केंद्र के तत्वावधान में भगवान महाकाल पांडुजी, डॉ. एस. के. शर्मा, डॉ. विनय सिंह के संयोजन में महाकवि कालिदास की रचनाओं और उनके जीवन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का, जिसमें सुधाकर गोयल एवं दीपक ने प्रेम, सौन्दर्य और जीवन चित्रण के संदर्भों के माध्यम से कालिदास के काव्य को अत्यंत प्रभावशाली बताया।
 मुख्य अतिथि के रूप में वक्ताओं ने कहा कि कालिदास का साहित्य सागर की भांति अगाध एवं आकाश की भांति अनंत है। उनके काव्य में प्रकृति, प्रेम और मानवीय भावनाओं का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। कालिदास की कृतियों में संस्कृत साहित्य का सर्वोच्च शिखर झलकता है।
   इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कालिदास के जीवन एवं कृतित्व पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी भी लगाई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न नृत्य प्रस्तुतियों में पारंपरिक वेशभूषा से कालिदास के काव्य को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रारंभ में मुख्य सूत्रधार डॉ. इन्दु सिंह व पूर्व प्राचार्य एमकेपी (पीजी कॉलेज) ने उपस्थित लोगों का अभिनंदन किया और रूपरेखा प्रस्तुत की।
       आयोजकों द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।