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क्या लिखूँ…?

डॉ.सरला सिंह`स्निग्धा`
दिल्ली
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वो कहती हैं मुझसे हमेशा,
कुछ अलग-सा गीत लिखो
खुशियों के सुरीले बोल लिए,
मीठे-मीठे से गीत लिखो।
कोयल-सी मीठी हो जो ऐसी,
मधुर-मधुर-सा संगीत लिखो
खिल जाए उपवन की कलियां,
ऐसा सुन्दर-सा गीत चुनो।
रंगों की सतरंगी रंगों वाली,
हो जाए ऐसी बरसात लिखो
इन्द्रधनुष रंगों-सा सुन्दर,
मधुरिम मधुर गीत चुनो।
राहों के कंटक-वंटक छोड़ो,
फूलों की सुन्दरता को देखो
छोड़ो दु:ख के राग कष्टदायी,
कोई सुखद-सा गीत चुनो।
अमावस की छोड़ो काली रातें,
चाँदनी चंचल रात चुनो
वो कहती हैं मुझसे हमेशा,
कुछ अलग-सा गीत लिखो।
छोड़ो समाज की सारी,
कटुता,ढकोसला,घटियापन
उसमें से सुन्दर से सुन्दर,
उल्लासित कर दे संगीत चुनो।
छोड़ो नीरस-सी सारी बातें,
सरस मधुर-सा गीत चुनो
जंगल के काँटों को छोड़ो,
बगिया के सुन्दर फूल चुनो।
पतझड़ के मौसम को छोड़ो,
वसन्त के सुन्दर गीत लिखो
सबके सब सिक्के के दो पहलू,
किसको छोड़ें किसको लिख दें।
हो जाए समाज ये रामराज्य-सा,
बस यही कामना ऐसा गीत मेरा॥

परिचय-आप वर्तमान में वरिष्ठ अध्यापिका (हिन्दी) के तौर पर राजकीय उच्च मा.विद्यालय दिल्ली में कार्यरत हैं। डॉ.सरला सिंह का जन्म सुल्तानपुर (उ.प्र.) में ४अप्रैल को हुआ है पर कर्मस्थान दिल्ली स्थित मयूर विहार है। इलाहबाद बोर्ड से मैट्रिक और इंटर मीडिएट करने के बाद आपने बीए.,एमए.(हिन्दी-इलाहाबाद विवि), बीएड (पूर्वांचल विवि, उ.प्र.) और पीएचडी भी की है। २२ वर्ष से शिक्षण कार्य करने वाली डॉ. सिंह लेखन कार्य में लगभग १ वर्ष से ही हैं,पर २ पुस्तकें प्रकाशित हो गई हैं। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। कविता (छन्द मुक्त ),कहानी,संस्मरण लेख आदि विधा में सक्रिय होने से देशभर के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लेख व कहानियां प्रकाशित होती हैं। काव्य संग्रह (जीवन-पथ),२ सांझा काव्य संग्रह(काव्य-कलश एवं नव काव्यांजलि) आदि प्रकाशित है।महिला गौरव सम्मान,समाज गौरव सम्मान,काव्य सागर सम्मान,नए पल्लव रत्न सम्मान,साहित्य तुलसी सम्मान सहित अनुराधा प्रकाशन(दिल्ली) द्वारा भी आप ‘साहित्य सम्मान’ से सम्मानित की जा चुकी हैं। आपकी लेखनी का उद्देश्य-समाज की विसंगतियों को दूर करना है।

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