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घुसपैठियों को मारना होगा

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’
ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर)

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सर्वविदित है कि घुसपैेठिए सदैव घातक ही होते हैं,चाहे वे देश में घुसपैठ कर आतंक मचाएं या घर में घुसपैठ कर घर को बर्बाद करें। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि,घुसपैठ आईएसआई करवा रही है या सास,साले अथवा फिर भाई-बंधु। फर्क इस बात से भी नहीं पड़ता कि वे बम विस्फोट करेंगे या दरवाजा तोड़ेंगेया यह कहेेंगे कि क्या उखाड़ लिया ? उन घुसपैठियों से बचना-निपटना उस समय और भी मुश्किल व असम्भव हो जाता है,जब उन घुसपैेठियों से अपने मिले होते हैं। वे चाहे अपने राज्यवासी हों या अपने बीवी-बच्चे हों। इसे घर का मामला कहकर पल्ला झाड़ दिया जाता है,मगर इन घुसपैठियों के आकाओं को कौन समझाए-बताए कि अब ऑपरेशन ‘सदभावना’ को त्याग कर ऑपरेशन ‘आल आऊट’ लागू हो चका है। इसलिए,इन घुसपैठियों के आका आईएसआई हो या सास-सालों सहित भाई-बंधु व बीवी-बच्चे हों,अब इन्हें सुधरना होगा,अन्यथा सुधार दिए जाएंगे,अर्थात मार दिए जाएंगे।

परिचय-इंदु भूषण बाली का साहित्यिक उपनाम `परवाज़ मनावरी`हैl इनकी जन्म तारीख २० सितम्बर १९६२ एवं जन्म स्थान-मनावर(वर्तमान पाकिस्तान में)हैl वर्तमान और स्थाई निवास तहसील ज्यौड़ियां,जिला-जम्मू(जम्मू कश्मीर)हैl राज्य जम्मू-कश्मीर के श्री बाली की शिक्षा-पी.यू.सी. और शिरोमणि हैl कार्यक्षेत्र में विभिन्न चुनौतियों से लड़ना व आलोचना है,हालाँकि एसएसबी विभाग से सेवानिवृत्त हैंl सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत आप पत्रकार,समाजसेवक, लेखक एवं भारत के राष्ट्रपति पद के पूर्व प्रत्याशी रहे हैंl आपकी लेखन विधा-लघुकथा,ग़ज़ल,लेख,व्यंग्य और आलोचना इत्यादि हैl प्रकाशन में आपके खाते में ७ पुस्तकें(व्हेयर इज कांस्टिट्यूशन ? लॉ एन्ड जस्टिस ?(अंग्रेजी),कड़वे सच,मुझे न्याय दो(हिंदी) तथा डोगरी में फिट्’टे मुँह तुंदा आदि)हैंl कई अख़बारों में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैंl लेखन के लिए कुछ सम्मान भी प्राप्त कर चुके हैंl अपने जीवन में विशेष उपलब्धि-अनंत मानने वाले परवाज़ मनावरी की लेखनी का उद्देश्य-भ्रष्टाचार से मुक्ति हैl प्रेरणा पुंज-राष्ट्रभक्ति है तो विशेषज्ञता-संविधानिक संघर्ष एवं राष्ट्रप्रेम में जीवन समर्पित है।