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जनचेतना

ओमप्रकाश अत्रि
सीतापुर(उत्तरप्रदेश)
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राजनीति,
हर घर की दहलीज़ पर
दस्तक देने लगी है,
प्रचार की चहल-पहल
गाँव-गाँव और,
शहर-शहर में
होने लगी है।

बढ़ा-चढ़ा कर,
भाषणों की ज़ुमलेबाजी
भोली-भाली जनता,
कुछ-कुछ समझने लगी है,
अब नहीं आएगी
बहकावे में यारों,
वह सीधे
तु्म्हारे फेंके गए वादों से
आँखें मिलाने लगी है।

अब तक
ठगते रहे हो तुम,
चिकनी-चुपड़ी बातों से
अब देश की जनता,
तुम्हारी जु़बान की सत्यता
पहचानने लगी है,
नहीं कर सकोगे
उनके अरमानों पर राजनीति,
उनको तुम्हारी अनीति की
भनक लग गयी है।

जवाब देगी
तुम्हारी करतूतों का,
और हाँ!
वह भी
तुम्हारे सियासी दांव पर,
दांव मारने लगी है,
जनता
अपने अधिकार
अपनी अस्मिता को,
अब बखूबी समझने लगी है॥

परिचय-ओमप्रकाश का साहित्यिक उपनाम-अत्रि है। १ मई १९९३ को गुलालपुरवा में जन्मे हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल स्थित विश्व भारती शान्ति निकेतन में रहते हैं,जबकि स्थाई पता-गुलालपुरवा,जिला सीतापुर है। आपको हिन्दी,संस्कृत,अंग्रेजी सहित अवधी,ब्रज,खड़ी बोली,भोजपुरी भाषा का ज्ञान है। उत्तर प्रदेश से नाता रखने वाले ओमप्रकाश जी की पूर्ण शिक्षा-बी.ए.(हिन्दी प्रतिष्ठा) और एम.ए.(हिन्दी)है। इनका कार्यक्षेत्र-शोध छात्र और पश्चिम बंगाल है। सामाजिक गतिविधि में आप किसान-मजदूर के जीवन संघर्ष का चित्रण करते हैं। लेखन विधा-कविता,कहानी,नाटक, लेख तथा पुस्तक समीक्षा है। कुछ समाचार-पत्र में आपकी रचनाएं छ्पी हैं। आपकी विशेष उपलब्धि-शोध छात्र होना ही है। अत्रि की लेखनी का उद्देश्य-साहित्य के विकास को आगे बढ़ाना और सामाजिक समस्याओं से लोगों को रूबरू कराना है। इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ सहित नागार्जुन और मुंशी प्रेमचंद हैं। आपके लिए प्रेरणा पुंज- नागार्जुन हैं। विशेषज्ञता-कविता, कहानी,नाटक लिखना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
“भारत की भाषाओंं में है 
अस्तित्व जमाए हिन्दी,
हिन्दी हिन्दुस्तान की न्यारी
सब भाषा से प्यारी हिन्दी।”