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जी चाहता है

मनोरमा जोशी ‘मनु’ 
इंदौर(मध्यप्रदेश) 
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सहे जुल्म जिसने सदियों
से अब तक,
उनको उबारो,यह जी चाहता है।

करते रहे आदिशक्ति की पूजा
मगर मातृशक्ति कुंठित रही है।
हुआ नहीं मान भूलकर भी,
नारी आज भी व्याकुल विवश
हो रही है।
तड़पती तिरस्कृत है आज ममता,
उसे अपनाने को जी चाहता
है।

दुर्गा लक्ष्मी अहिल्या सीता,
सावित्री मीरा अनसुईया
गार्गी मैयत्री सारंगा पन्ना,
न जाने कौन-सी है ऐसी ललना,
करें संरक्षण दें उच्च शिक्षा
प्रतिष्ठा दिलाने को जी चाहता है।

दिया जन्म जिसने शैशव
में खेले,
भूल अहसान उसका ये,
क्या कर रहे हो ?
पलती हुई गर्भ में है
जो मातृशक्ति,
शिक्षित कृतघ्न बन क्यों,
वध कर रहे हो ?
लुप्त हो जायगी मानव जाति
इससे,
यह एहसास कराने को,
जी चाहता है।

सहे जुल्म जिसने सदियों से…
अब तक,
उनको उबारो ये
जी चाहता है॥

परिचयश्रीमती मनोरमा जोशी का निवास मध्यप्रदेश के इंदौर जिला स्थित विजय नगर में है। आपका साहित्यिक उपनाम ‘मनु’ है। आपकी जन्मतिथि १९ दिसम्बर १९५३ और जन्मस्थान नरसिंहगढ़ है। शिक्षा-स्नातकोत्तर और संगीत है। कार्यक्षेत्र-सामाजिक क्षेत्र-इन्दौर शहर ही है। लेखन विधा में कविता और लेख लिखती हैं।विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी लेखनी का प्रकाशन होता रहा है। राष्ट्रीय कीर्ति सम्मान सहित साहित्य शिरोमणि सम्मान और सुशीला देवी सम्मान प्रमुख रुप से आपको मिले हैं। उपलब्धि संगीत शिक्षक,मालवी नाटक में अभिनय और समाजसेवा करना है। आपके लेखन का उद्देश्य-हिंदी का प्रचार-प्रसार और जन कल्याण है।कार्यक्षेत्र इंदौर शहर है। आप सामाजिक क्षेत्र में विविध गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं। एक काव्य संग्रह में आपकी रचना प्रकाशित हुई है।