रचना पर कुल आगंतुक :198

You are currently viewing तम हटेगा, मन जुड़ेगा

तम हटेगा, मन जुड़ेगा

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
******************************************

दीपावली विशेष…

मन मुस्काएँ,
मिटाना मन मैल-
दीप जलाएँ।

दीप बहार,
चलो, रंग दिवाली-
खुशी त्योहार।

घर रोशन,
हर चमके कोना-
रंग-रोगन।

पावन दिन,
रहे सब खुशियाँ-
लालच बिन।

लक्ष्मी प्रवेश-
शुभ करें पूजन-
चहके देश।

ज्योति दिवाली,
जगमग आ गई-
पूजन थाली।

साफ-सफाई,
रंग दीप-पटाखे-
फूल मिठाई।

तम हटेगा,
घर रोशन दीप-
मन जुड़ेगा।

धर्म-संस्कृति,
मनवा नाचे खुशी-
भगा विकृति।

कर मदद,
थाम गरीब हाथ-
बन निडर।

मना दिवाली,
मिठाई बाँटें खुशी-
हो खुशहाली।

दीप आँगन,
मजा, धूमधाम-
मन भावन।

मिले आशीष,
नव उजाला कृपा-
झुकाएं शीश।

फैला आलोक,
नवदीप खुशी राह-
भगाएं शोक।

दुखी समाज,
मॅंहगाई, क्या मार-
मुश्किल आज।

मन कामना,
सुख पसंद शांति-
शुद्ध भावना।

दीप प्रकाश,
चाह निर्मल सुख-
रोशन आस।

मिटाओ क्लेश,
उल्लास संग सुख-
प्रसन्न देश।

खुशी तरस,
कृपा ईश गरीब-
धन बरस।

सेना सीमाएँ,
मिटे गरीबी, कष्ट-
खुशियाँ आएँ।

हो परमार्थ,
देश हो मनोरथ-
डूबे स्वार्थ।

भागे कपट,
देश जनता सुखी-
मिटे संकट॥

Leave a Reply