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जनगणना करेंगे

कुमारी ऋतंभरा
मुजफ्फरपुर (बिहार)
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जनगणना करेंगे हम भारत की,
भारत में मेरा गाँव है
गाँव में मेरा घर दिखता है,
वहीं से शुरू पहचान है।

मास्टर जी द्वार आएँगे,
दरवाज़ा जब खटखटाएँगे
धूप में तपकर आए होंगे,
पसीने से लथ-पथ बदन होगा।

बेचारे खड़े-खड़े पानी भी माँग न पाएँगे,
पर हमसे सवाल पूछते जाएँगे—
माँ का नाम, पिता की पहचान,
भाई-बहन का प्रमाण भी माँगते जाएँगे।

ज़मीन-जायदाद, गाड़ी-मोटर,
सबकी जानकारी लिखते जाएँगे
एक-एक बात कागज़ पर नहीं,
अब मोबाइल में चढ़ाते जाएँगे।

हम रहते हैं भारत में,
भारत के नागरिक कहलाते हैं
तो फर्ज़ बनता है हमारा भी,
सच-सच सब बतलाते हैं।

ग्यारह बरस में आता है ये पर्व,
ये भारत की परम्परा है
आओ मिलकर इसे मनाएँ,
ये देश की धरोहर है।

भूखे-प्यासे मास्टर जी को,
हम प्रेम से चाय पिलाएँगे
जनगणना करने वालों का,
हम सब मिलकर साथ निभाएँगे।

क्योंकि जब गिना जाएगा हर घर,
तभी बनेगी सही योजनाएं
स्कूल, अस्पताल, राशन, सड़क—
सबका हक़ तभी मिल पाए।

तो आओ, अपनी जवाबदेही निभाएँ,
एक-एक जानकारी सच बताएँ।
आया देखो जनगणना का पर्व,
मिलकर इतिहास लिखवाएँ॥