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तृप्ति

विजयसिंह चौहान
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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कालू,भूरू,और गोरिया यथा नाम तथा गुण के साथ रंग-रूप से भी मेल खाते,तीन दोस्त…
तीनों कल रतलाम वाले बाबूजी की शवयात्रा में न्यौछावर की गई चिल्लर (सिक्के)लूट रहे थे। ‘राम नाम सत्य है’ के बीच जीवन का शाश्वत सत्य ‘पैसा’ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा था।
तकरीबन ३ किलोमीटर तक शवयात्रा के साथ चले और सिक्कों के लिए संघर्ष के पश्चात तीनों बच्चों ने तकरीबन ७० रुपए जमा कर लिए।
शवयात्रा श्मशान तक पहुंची और तीनों दोस्तो ने सेंव-परमल,बेक समोसा और पानी के पाउच लिए एवं पसीना पोंछते हुए श्मशान में ही पार्टी कर ली।
उधर बाबूजी को घी-गुड़ का भोग लगाया जा रहा था,इधर तीनों के चेहरे पर तृप्ति का भाव नज़र आ रहा था।

परिचय : विजयसिंह चौहान की जन्मतिथि ५ दिसम्बर १९७० और जन्मस्थान इन्दौर(मध्यप्रदेश) हैl वर्तमान में इन्दौर में ही बसे हुए हैंl इसी शहर से आपने वाणिज्य में स्नातकोत्तर के साथ विधि और पत्रकारिता विषय की पढ़ाई की,तथा वकालात में कार्यक्षेत्र इन्दौर ही हैl श्री चौहान सामाजिक क्षेत्र में गतिविधियों में सक्रिय हैं,तो स्वतंत्र लेखन,सामाजिक जागरूकता,तथा संस्थाओं-वकालात के माध्यम से सेवा भी करते हैंl लेखन में आपकी विधा-काव्य,व्यंग्य,लघुकथा और लेख हैl आपकी उपलब्धि यही है कि,उच्च न्यायालय(इन्दौर) में अभिभाषक के रूप में सतत कार्य तथा स्वतंत्र पत्रकारिता जारी हैl