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दृष्टिकोण

डॉ. वंदना मिश्र ‘मोहिनी’
इन्दौर(मध्यप्रदेश)
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विवाह की रस्में चल रहीं थी। दूल्हे की भाभी बड़ी खुश होकर सारी रस्म-रिवाजों का निर्वाहन कर रही थी, इस दौरान कई बार उनकी आवाज तेज हो जाती। तभी किसी ने भाभी से कहा-“भाभी जी, बधाई हो, आपको जेठानी बनने की।”
“जेठानी नहीं… बड़ी बहन कहो। मैं तो अपनी छोटी बहन को लेकर जा रही हूँ। मेरी तो छोटी बहन है नहीं, अब आज से शीतल ही मेरी छोटी बहन है।”
मैंने उनके इस सकारात्मक दृष्टिकोण को मन ही मन सराहा। तभी मैं अंदर गई, जहाँ दुल्हन तैयार हो रही थी। उसकी किसी सहेली ने उसके पास आकर कहा- “सुन! तेरी जेठानी की आवाज बड़ी तेज है।”
तभी दुल्हन बनी शीतल बड़े तीखे स्वर में बोली- “अभी बोलने दे, जिस दिन मेरी तेज आवाज सुनेंगी उस दिन उसकी अपने-आप बंद हो जाएगी…।”
मैं हैरत में थी कि, दोनों के दृष्टिकोण में कितना अंतर है।

परिचय-डॉ. वंदना मिश्र का वर्तमान और स्थाई निवास मध्यप्रदेश के साहित्यिक जिले इन्दौर में है। उपनाम ‘मोहिनी’ से लेखन में सक्रिय डॉ. मिश्र की जन्म तारीख ४ अक्टूबर १९७२ और जन्म स्थान-भोपाल है। हिंदी का भाषा ज्ञान रखने वाली डॉ. मिश्र ने एम.ए. (हिन्दी),एम.फिल.(हिन्दी)व एम.एड.सहित पी-एच.डी. की शिक्षा ली है। आपका कार्य क्षेत्र-शिक्षण(नौकरी)है। लेखन विधा-कविता, लघुकथा और लेख है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन कुछ पत्रिकाओं ओर समाचार पत्र में हुआ है। इनको ‘श्रेष्ठ शिक्षक’ सम्मान मिला है। आप ब्लॉग पर भी लिखती हैं। लेखनी का उद्देश्य-समाज की वर्तमान पृष्ठभूमि पर लिखना और समझना है। अम्रता प्रीतम को पसंदीदा हिन्दी लेखक मानने वाली ‘मोहिनी’ के प्रेरणापुंज-कृष्ण हैं। आपकी विशेषज्ञता-दूसरों को मदद करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-“हिन्दी की पताका पूरे विश्व में लहराए।” डॉ. मिश्र का जीवन लक्ष्य-अच्छी पुस्तकें लिखना है।