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धरा की धीरता धन्य

वन्दना शर्मा
अजमेर (राजस्थान)

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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……………


धन्य है धरा की धीरता को..,
जहाँ जीवन कलकल बहता है..
सींचता हुआ जड़ी-बूटी,वनस्पति,
धान्य एवं धमनियों को..
पेड़ों से मिलती है संजीवनी प्राणवायु..,
धरती अपना सीना चीरकर..
करती है पोषण प्राणी मात्र का..,
अपनी कोख से प्रसूता कष्ट सहन कर..
भरती है मणि रत्नों,धातुओं से..
मानव के भण्डार..,
ओढ़कर धानी चुनर माँ बनकर..
खिलाती है एक एक निवाला..,
अपने ममतामय करकमलों से..
और बदले में क्या पाती है ?….
अपमान,तिरस्कार,उपेक्षा..
कूड़ा,कचरा,गन्दगी..,
उजाड़ा जाता है स्वार्थी पुत्रों के हाथों..
उसका श्रृंगार..,
छीना जाता है उसका समृद्ध कोष..
प्रताड़ित किया जाता है उसके सम्मान को..,
नोंचा जाता है उसकी ममता को..
फिर भी निर्विकार भाव से सहती जाती है..
अपने माता होने का फर्ज निभाती जाती है..,
धन्य है धरा की धीरता को..
आज उसकी कष्ट सहिष्णुता की
अति हो गयी है..’
उसको भू ऊष्मीकरण का गम्भीर ताप हो गया है..
अब जरूरत है सुपुत्र को अपना फर्ज निभाने की
धरती माँ के एहसानों का कर्ज चुकाने की..,
अन्यथा धरती माँ के इस ताप में
भस्म हो जाएगी सारी कायनात..,
हमें जागना होगा..
स्वार्थ के घरौंदे से बाहर झाँकना होगा..,
धरती हमें कितना देती है
हमें भी उसको कुछ उचित उपचार देना होगा..,
उठाओ हाथ और करो प्रतिज्ञा..।

परिचय-वंदना शर्मा की जन्म तारीख १ मई १९८६ और जन्म स्थान-गंडाला(बहरोड़,अलवर)हैl वर्तमान में आप पाली में रहती हैंl स्थाई पता-अजमेर का हैl राजस्थान के अजमेर से सम्बन्ध रखने वाली वंदना शर्मा की शिक्षा-हिंदी में स्नातकोत्तर और बी.एड. हैl आपका कार्यक्षेत्र-नौकरी के लिए प्रयासरत होना हैl लेखन विधा-मुक्त छंद कविता हैl इनकी लेखनी का उद्देश्य- स्वान्तःसुखाय तथा लोकहित हैl जीवन में प्रेरणा पुंज-गुरुजी हैंl वंदना जी की रुचि-लेखन एवं अध्यापन में है|