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न आँचल मैला होगा,रखेंगे स्वच्छ

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’
रोहतक (हरियाणा)
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विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष………


चिंटू ने भी मनाया मिंटू ने भी मनाया,
सबने पटाखे छोड़े खूब धुआं उड़ाया।
मोमबत्ती भी जलाई और फिर बुझाई,
और सबने खुशी से खाई खूब मिठाई।

कब किसको बूढ़ी माँ का ध्यान आया,
कब किसी ने उसका जन्मदिन मनाया।
युगों से पालन में जो लगी हुई है,
संतान हेतु सर्द गर्म हिमपात सही है।

सदियों से जो पालती-पोसती रही,
पर्वतीय हाथों से प्रलय रोकती रही।
गोदी देती है-जन्म से मरण तक,
देती हैं जो सौंदर्य के आभरण तक।

दिल की सरिता से जो प्यास बुझाती है,
जिसने दिल को धारा,वही ‘धरा’ कहाती है।
अपनी गोद में उपजाती हो जीवन सरस,
बाईस अप्रैल को आ रहा तेरा जन्मदिवस।

कितने महापुरुष उपजे ममता की मिट्टी में,
नहीं इतनी सहनशीलता अपनापन किसी में।
कब भेद किया जाति-धर्म पर समता में,
सागर भी छोटा पड़ता है तेरी ममता से।

अब हम भी कसम खाते हैं धरती माँ,
न आँचल मैला होगा,रखेंगे स्वच्छ सदा।
कारखानों वाहनों के धुएँ से न घुटने देंगे दम,
वृक्ष हैं तेरे केश,हम न होने देंगे कम।

तेरी नाड़ी-सरिताएं करती कल-कल,
रखेंगे हम माता इन्हें सदा ही निर्मल।
पर्वत तेरी भुजाएं हम मजबूत रखेंगे,
शस्य स्यामला आँचल न रंगहीन करेंगे।

न तन से कुछ प्रदूषण होगा अब यहां,
न मन से कुछ प्रदूषण होगा अब यहां।
माँ की चुनरी को न रक्त से रंगवाएंगे,
तेरे सच्चे बच्चे बन सदा प्रेम निभाएंगे॥

परिचय–डॉ.चंद्रदत्त शर्मा का साहित्यिक नाम `चंद्रकवि` हैl जन्मतारीख २२ अप्रैल १९७३ हैl आपकी शिक्षा-एम.फिल. तथा पी.एच.डी.(हिंदी) हैl इनका व्यवसाय यानी कार्य क्षेत्र हिंदी प्राध्यापक का हैl स्थाई पता-गांव ब्राह्मणवास जिला रोहतक (हरियाणा) हैl डॉ.शर्मा की रचनाएं यू-ट्यूब पर भी हैं तो १० पुस्तक प्रकाशन आपके नाम हैl कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचना प्रकाशित हुई हैंl आप रोहतक सहित अन्य में भी करीब २० साहित्यिक मंचों से जुड़े हुए हैंl इनको २३ प्रमुख पुरस्कार मिले हैं,जिसमें प्रज्ञा सम्मान,श्रीराम कृष्ण कला संगम, साहित्य सोम,सहित्य मित्र,सहित्यश्री,समाज सारथी राष्ट्रीय स्तर सम्मान और लघुकथा अनुसन्धान पुरस्कार आदि हैl आप ९ अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हो चुके हैं। हिसार दूरदर्शन पर रचनाओं का प्रसारण हो चुका है तो आपने ६० साहित्यकारों को सम्मानित भी किया है। इसके अलावा १० बार रक्तदान कर चुके हैं।