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भारत का चौकीदार

विजय कुमार
मणिकपुर(बिहार)

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मैं हूँ भारत का चौकीदार
दिन-रात रहता हूँ पहरेदार,
घुसपैठ नहीं होने दूँगा
दुश्मन को मैं ठोक दूँगा।

परिंदों को पंख काटकर
आकाश में मैं छोड़ दूँगा,
भारत की शान को मैं
कभी नहीं झुकने दूँगा।

हिन्दुस्तान हमारी जान है
मर्यादा पुरुषोत्तम की धाम है,
अहंकारी का महाविनाश है
यमलोक उनका धाम है।

तू क्या जाने अमृत की धार
तुम तो हो विष पीने को यार,
मैं हूँ भारत का चौकीदार
दिन-रात रहता हूँ पहरेदार॥

परिचय-विजय कुमार का बसेरा बिहार के ग्राम-मणिकपुर जिला-दरभंगा में है।जन्म तारीख २ फरवरी १९८९ एवं जन्म स्थान- मणिकपुर है। स्नातकोत्तर (इतिहास)तक शिक्षित हैं। इनका कार्यक्षेत्र अध्यापन (शिक्षक)है। सामाजिक गतिविधि में समाजसेवा से जुड़े हैं। लेखन विधा-कविता एवं कहानी है। हिंदी,अंग्रेजी और मैथिली भाषा जानने वाले विजय कुमार की लेखनी का उद्देश्य-सामाजिक समस्याओं को उजागर करना एवं जागरूकता लाना है। इनके पसंदीदा लेखक-रामधारीसिंह ‘दिनकर’ हैं। प्रेरणा पुंज-खुद की मजबूरी है। रूचि-पठन एवं पाठन में है।