मित्र गुणों की खान

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राजबाला शर्मा ‘दीप’
अजमेर(राजस्थान)
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मित्रता और जीवन…

मित्र हो तो इत्र सम,
जीवन को महकाय
मन-आँगन शीतल करे,
नेह-सुधा बरसाय।

मित्र हमें ऐसा मिले,
नीर-क्षीर, विद्वान
अज्ञानी हो मित्र तो,
जीवन नरक समान।

जीवन की मुस्कान है,
हँसी-खुशी की शान
मित्र है अनमोल रत्न,
मित्र गुणों की खान।

मित्र कभी बनता गुरु,
बनता है कभी भाई
मित्र काम आता सदा,
जब भी विपदा आई।

मित्र वो जीवन-दीप है,
तम में राह दिखाए
दूर करे दुर्गण मेरे,
सच की राह दिखाए।

मित्र ना देखे ऊंच-नीच,
जाति ना संप्रदाय
दीन सुदामा के लिए
कान्हा दौड़े आय।

चंद्र-पृथ्वी सी मित्रता,
दूजी मिले ना कोई
जन्म-मरण में साथ थे,
अटल मित्रता होई।

मित्र मेरा अनमोल है,
जिसका मोल न तोल
विरले मिलते मित्र हैं,
कह गए ज्ञानी बोल।

ईश्वर के वरदान से,
प्यारा मिला है मित्र।
मुझको तो अभिमान है,
तुमसा मिला है मित्र॥

परिचय– राजबाला शर्मा का साहित्यिक उपनाम-दीप है। १४ सितम्बर १९५२ को भरतपुर (राज.)में जन्मीं राजबाला शर्मा का वर्तमान बसेरा अजमेर (राजस्थान)में है। स्थाई रुप से अजमेर निवासी दीप को भाषा ज्ञान-हिंदी एवं बृज का है। कार्यक्षेत्र-गृहिणी का है। इनकी लेखन विधा-कविता,कहानी, गज़ल है। माँ और इंतजार-साझा पुस्तक आपके खाते में है। लेखनी का उद्देश्य-जन जागरण तथा आत्मसंतुष्टि है। पसंदीदा हिन्दी लेखक-शरदचंद्र, प्रेमचंद्र और नागार्जुन हैं। आपके लिए प्रेरणा पुंज-विवेकानंद जी हैं। सबके लिए संदेश-‘सत्यमेव जयते’ का है।

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