डॉ.एन.के. सेठी
बांदीकुई (राजस्थान)
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‘रामनवमी’ विशेष (२६ मार्च)…
करना तुम विश्वास, राम है मुक्ति प्रदाता।
जगती का आधार, सभी के भाग्य विधाता॥
असुरों के हैं काल, भक्त की रक्षा करते।
कण-कण में हैं व्याप्त, कष्ट सबका ये हरते।।
करते हैं विश्वास, राम मर्यादा पालक।
चलें न्याय की राह, यही हैं जग संचालक।।
सबके हैं आराध्य, राम सबके मन में हैं।
सूरत है अभिराम, लोक प्रिय जन जन में हैं।।
करने को उद्धार, जगत में आप पधारे।
शिला बनी जो नार, गौतमी को ये तारे।।
राम आस विश्वास, सभी का एक सहारा।
निर्बल के बल राम, पापियों को भी तारा।।
पितु आज्ञा को धार, बने थे ये वनवासी।
त्याग दिया सब राज्य, बने राघव संन्यासी।।
जन जन के आदर्श, दशानन को संहारा।
खाकर झूठे बेर, मात शबरी को तारा।।
मैं करता विश्वास, विनय मेरी सुन लेना।
दया करो हे नाथ, भक्ति वर मुझको देना।।
जोडूं प्रभु मैं हाथ, बीच में अटकी नैया।
विनती करता नित्य, आप ही हैं खेवैया॥
परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय में प्राचार्य (बांदीकुई,दौसा) डॉ.एन.के. सेठी का बांदीकुई में ही स्थाई निवास है। १९७३ में १५ जुलाई को बड़ियाल कलां,जिला दौसा (राजस्थान) में जन्मे नवल सेठी की शैक्षिक योग्यता एम.ए.(संस्कृत,हिंदी),एम.फिल.,पीएच-डी.,साहित्याचार्य, शिक्षा शास्त्री और बीजेएमसी है। शोध निदेशक डॉ.सेठी लगभग ५० राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र वाचन कर चुके हैं,तो कई शोध पत्रों का अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन हुआ है। पाठ्यक्रमों पर आधारित लगभग १५ से अधिक पुस्तक प्रकाशित हैं। आपकी कविताएं विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। हिंदी और संस्कृत भाषा का ज्ञान रखने वाले राजस्थानवासी डॉ. सेठी सामाजिक गतिविधि के अंतर्गत कई सामाजिक संगठनों से जुड़ाव रखे हुए हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत तथा आलेख है। आपकी विशेष उपलब्धि-राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध-पत्र का वाचन है। लेखनी का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय है। मुंशी प्रेमचंद इनके पसंदीदा हिन्दी लेखक हैं तो प्रेरणा पुंज-स्वामी विवेकानंद जी हैं। देश और हिंदी भाषा के प्रति आपके विचार-
‘गर्व हमें है अपने ऊपर,
हम हिन्द के वासी हैं।
जाति धर्म चाहे कोई हो,
हम सब हिंदी भाषी हैं॥’