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रिश्ते दिलों के…

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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ऐसे…किया उपकार,
एहसासों…का उधार
सौंधी खुशबू…भरमार,
ऐसे…जुड़े दिल के तार।
रिश्ते दिलों के…

जहाँ…दुश्मनी लाचार,
जहाँ…नहीं व्यभिचार
जहाँ…मिलते विचार,
जहाँ…नहीं तलवार।
रिश्ते दिलों के…

जहाँ… होता न आभार,
जहाँ…नहीं तिरस्कार
जहाँ…नहीं हाहाकार,
जहाँ…भरोसे औजार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…फूलों का भार,
जैसे…रंगों की मार
जैसे…ठंडी बयार,
जैसे…सावन की फुहार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…बसंत की बहार,
जैसे…खिलती कचनार
जैसे…मासूम-सा प्यार,
जैसे…माँ का दुलार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…मणियों का हार,
जैसे…पपीहे की पुकार
जैसे…चातक गुहार,
जैसे…श्रावणी श्रंगार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…औचक उपहार,
जैसे…माया बाजार
जैसे…गहरे गुफा गार,
जैसे…चंद्रमा हजार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…प्रेमी की मनुहार,
जैसे…नखरेली नार
जैसे…नमकीन हो खार,
जैसे….नैया पार मंझधार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…नक्षत्रों के पार,
जैसे…सितारों के द्वार
जैसे…किस्से का सार,
जैसे…पुराना अचार।
रिश्ते दिलों के…

जैसे…साधु-सा व्यवहार
जैसे…मोती का भंडार
जैसे…सुरीली सितार।
रिश्ते दिलों के…,
जहाँ…प्यार, प्यार, प्यार…॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।