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ललकार

रेनू सिंघल
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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कारगिल विजय दिवस स्पर्धा विशेष……….


उबल रहा है रक्त भुजाओं में…

धधक रही है ज्वाला दिलों में,

सिरफिरे नापाक इरादों ने आज

हदें तोड़ दी बर्बरता,कायरता की।

औकात नहीं कि युद्ध करें वो,

पीठ पीछे सदा वार करें ये।

दम है तो रण में सामने आओ,

तुम जैसे गीदड़ कायरों के लिए तो

सिंह-सी गर्जना ही काफी है।

तुम छुप-छुप कर वार हो करते,

सामने आने से डरते हो

ओ नामर्दों दम हो तो आओ।

हम एक तुम सौ-सौ पर भारी,

अब ललकार गूँजेगी हमारी।

हो जाओ तैयार कायरों अब तुम,

रक्त पिएंगे अब छाती का तुम्हारा।

नामोनिशान मिटा कर तुम्हारा,

सारी नस्ल ही खत्म कर देंगे॥

परिचय-रेनू सिंघल का निवास लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में है। १९६९ में ९ फरवरी को हापुड़ (उत्तर प्रदेश) में जन्मीं हैं। आपको हिंदी-अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है। गणित से स्नातक(बी.एस-सी.)श्रीमती सिंघल का कार्यक्षेत्र-लेखन का है। सामाजिक गतिविधि के अन्तर्गत आप साहित्य सृजन द्वारा सामाजिक चेतना जागृत करती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत,ग़ज़ल,कहानी और लेख है। ‘अलकनंदा’ साझा काव्य संकलन सहित कई पत्र-पत्रिकाओं में भी रचनाएँ प्रकाशित हैं। प्राप्त सम्मानों में-साहित्य श्री सम्मान,काव्य रंगोली मातृत्व ममता सम्मान- २०१८,प्रजातन्त्र का स्तम्भ गौरव पुरस्कार- २०१९ और सी. वी. रमण शांति सम्मान-२०१९ आदि हैं।